राजधानी देहरादून सहित राज्य में रेडी, पटरी फेरी तथा फुटपाथ व्यवसाईयों का तत्काल उत्पीड़न रोकने हेतु आज सभी व्यवसाईयों ने उत्तराखंड सचिवालय का घेराव किया उनका कहना है कि समाज के कमजोर वर्ग तथा इससे जुड़े फुटपाथ व्यवसाययों रेडी पटरी ठेली वालों का सुनियोजित ढंग से आए दिन उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने माना है कि फुटपाथ व्यावसायिक समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो बिना किसी सरकारी सहयोग के स्वयं एवं अपने परिवार को न केवल भरोसा करता है बल्कि अन्य लोगों को भी रोजगार देता है। दिसंबर में हुए इन्वेस्टर सम्मिट को लेकर राज्य सरकार ने सभी सड़कों से ठेली वालों को हटा दिया गया था, तथा उन्हें आश्वासन दिया गया था कि वह अपना ठेला, रेहड़ी इन्वेस्टर समिट खत्म होने के बाद लगा सकते हैं लेकिन इन्वेस्टर समिट समाप्त होने के बाद सरकार इन सभी व्यवसाईयों का उत्पीड़न कर रही है और सरकार का कहना है कि फुटपाथ व्यवसाईयों की दुकान लगाने के कारण यातायात व्यवस्था खराब होती है इन्हें कभी विप मोमेंट के नाम पर डंडे के बल पर हटाया जाता है तथा कभी इसे बदतमीजी करके इन सभी का चालान किया जाता है
