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रांची में क्रिकेट का जलवा, राष्ट्रीय खेल दिवस पर तीन दिवसीय मेगा खेल महोत्सव का आगाज- NATIONAL SPORTS DAY 2025

रांची:  राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर झारखंड की राजधानी रांची शुक्रवार को क्रिकेट के रंग में रंगी दिखाई दी। मोरहाबादी स्थित जेएससीए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में राज्य सरकार और खेल विभाग की ओर से तीन दिवसीय राज्यस्तरीय क्रिकेट महोत्सव का शुभारंभ हुआ। इस मौके पर खेल मंत्री सुदिव्य कुमार, विभागीय सचिव मनोज कुमार, निदेशक शेखर जमुआर, पूर्व कप्तान सौरव गांगुली और झारखंड के क्रिकेट आइकन महेंद्र सिंह धोनी समेत कई दिग्गज मौजूद रहे।

तीन दिवसीय क्रिकेट महाकुंभ की शुरुआत

इस विशेष क्रिकेट आयोजन में राज्य के विभिन्न जिलों से आए 25 से अधिक क्रिकेट टीमों के खिलाड़ियों ने भाग लिया। अंडर-16, अंडर-19 और सीनियर स्तर की प्रतियोगिताओं को लेकर क्रिकेट प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह देखा गया। पहले दिन उद्घाटन मुकाबले में रांची और जमशेदपुर की टीमों के बीच शानदार भिड़ंत हुई, जिसमें रोमांचक खेल के चलते दर्शकों में उत्साह चरम पर पहुंच गया।

खेल विभाग की ओर से बताया गया कि इस आयोजन का मकसद क्रिकेट प्रतिभाओं को निखारना और उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के अवसर प्रदान करना है। इसके लिए राज्य सरकार ने विशेष बजट जारी किया है। आयोजन में खिलाड़ियों को सम्मानित करने के साथ-साथ प्रशिक्षण शिविर, कार्यशालाएं और कैरियर गाइडेंस सेशन भी रखे गए हैं।

खिलाड़ियों का सम्मान और कैश अवार्ड

कार्यक्रम के पहले दिन राज्यभर के 200 से अधिक क्रिकेटरों और प्रशिक्षकों को सम्मानित किया गया। खेल विभाग की ओर से चयनित खिलाड़ियों को कैश अवार्ड भी प्रदान किया गया। विभाग ने इसके लिए दो करोड़ रुपये से अधिक का बजट तय किया था। सम्मान पाकर खिलाड़ियों के चेहरे खिल उठे।

एक युवा क्रिकेटर ने कहा, “सरकार का यह कदम हमारे लिए प्रेरणादायी है। इससे हमें न केवल आर्थिक सहयोग मिला है, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ा है। अब हम और मेहनत कर बेहतर प्रदर्शन करेंगे।”

धोनी और गांगुली की मौजूदगी ने बढ़ाया उत्साह

इस आयोजन का सबसे खास आकर्षण था कि इसमें पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली और झारखंड के स्टार खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी शामिल हुए। धोनी ने खिलाड़ियों से बातचीत करते हुए कहा कि अनुशासन और लगातार मेहनत ही क्रिकेट में सफलता की कुंजी है। उन्होंने कहा, “झारखंड की मिट्टी में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत है सही अवसर और सही मार्गदर्शन की।”

सौरव गांगुली ने भी अपने संबोधन में कहा कि झारखंड के खिलाड़ी अब केवल घरेलू स्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी पहचान बना रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार के इस प्रयास की सराहना की।

खेल मंत्री का ऐलान

खेल मंत्री सुदिव्य कुमार ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में झारखंड को क्रिकेट की नर्सरी के रूप में स्थापित किया जाए। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की सीधी नियुक्ति योजना में बदलाव किया जा रहा है, ताकि प्रतिभाशाली क्रिकेटरों को न केवल पुरस्कार मिले बल्कि रोजगार और कैरियर निर्माण के अवसर भी उपलब्ध हों।

मंत्री ने यह भी कहा कि आने वाले महीनों में क्रिकेट प्रशिक्षण के लिए नए अकादमी केंद्र खोले जाएंगे और ग्रामीण क्षेत्रों तक सुविधाएं पहुंचाई जाएंगी।

उत्सव का माहौल और दर्शकों का जोश

स्टेडियम का माहौल पूरी तरह उत्सवमय रहा। मैदान में खिलाड़ियों, अधिकारियों, प्रशिक्षकों और क्रिकेट प्रेमियों की मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि झारखंड की धरती क्रिकेट के जुनून से भरी हुई है। दर्शकों ने जोरदार तालियों से खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया। पहले दिन खेले गए मुकाबलों में कई युवा खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन कर सबका ध्यान खींचा। विशेषकर अंडर-19 के बल्लेबाजों की ताबड़तोड़ पारी ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। गेंदबाजों ने भी शानदार प्रदर्शन कर भविष्य के सितारे होने का संकेत दिया।

क्रिकेट संस्कृति को नई ऊर्जा

खेल विभाग के अधिकारियों ने कहा कि यह आयोजन केवल सम्मान समारोह तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य राज्य की क्रिकेट संस्कृति को नई ऊर्जा देना है। आने वाले दो दिनों तक क्रिकेट के रोमांचक मुकाबले, खिलाड़ियों के लिए कार्यशालाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार का यह प्रयास लगातार जारी रहा तो झारखंड आने वाले वर्षों में क्रिकेट की सबसे मजबूत नर्सरी के रूप में उभरेगा।

खिलाड़ियों की उम्मीदें

एक खिलाड़ी ने कहा, “आज हमें जो सम्मान मिला है, उससे प्रेरणा मिली है कि मेहनत कर हम भी राज्य और देश का नाम रोशन करें। उम्मीद है कि भविष्य में प्रशिक्षण और सुविधाओं में और बढ़ोतरी होगी।”

दूसरे खिलाड़ी ने कहा कि झारखंड में कई युवा क्रिकेटर ऐसे हैं जिन्हें सही प्लेटफॉर्म की जरूरत है। अगर राज्य सरकार और बीसीसीआई मिलकर इन खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का अवसर दें तो झारखंड से एक नहीं, कई धोनी निकल सकते हैं।

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