देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो का संचालन करने वाली कंपनी इंटरग्लोब एविएशन ने शुक्रवार को सितंबर तिमाही के नतीजे जारी किए। दो साल बाद आमदनी बढ़ने के बावजूद एयरलाइन एक बार फिर घाटे में है। कंपनी के आंकड़ों के अनुसार जुलाई-सितंबर तिमाही में उसे 986.7 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ। कपनी के अनुसार विमानों के खड़े होने और ईंधन की ऊंची लागत से उसके मुनाफे पर असर पड़ा। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में इंडिगो का मुनाफा 2,728 करोड़ रुपये था। वहीं, एक साल पहले सितंबर 2023 में समाप्त तिमाही के दौरान एयरलाइन का मुनाफा 188.9 करोड़ रुपये था।
इंडिगो के अनुसार दूसरी तिमाही में ईंधन पर खर्च 12.8 प्रतिशत बढ़कर 6,605.2 करोड़ रुपये हो गया, एक साल पहले इसी अवधि में यह खर्च 5,856 करोड़ रुपये था। दूसरी तिमाही में विमान और इंजन का किराया भी बढ़कर 763.6 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में महज 195.6 करोड़ रुपये था। इसके अलावे कंपनी ने सितंबर तिमाही में करीब 79.6 करोड़ रुपये का टैक्स चुकाया, जबकि एक साल पहले कंपनी ने टैक्स मद में महज 20 लाख रुपये चुकाए थे। सितंबर तिमाही में कंपनी का कुल व्यय लगभग 22 प्रतिशत बढ़कर 18,666.1 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी का घाटा बढ़ाने में इस आंकड़े का सबसे अधिक योगदान रहा।
इंडिगो की प्रति यात्री आय (प्रति किलोमीटर लागत के आधार पर गणना की जाने वाली यील्ड) सितम्बर तिमाही में 2.3 प्रतिशत बढ़कर 4.55 रुपये प्रति किलोमीटर हो गई, जबकि एक साल पहले इसी तिमाही में यह यह 4.44 रुपये प्रति किलोमीटर और अप्रैल-जून तिमाही में 5.24 रुपये प्रति किलोमीटर थी। सितंबर तिमाही के आंकड़ों के अनुसार इंडिगो की आय 13.6% बढ़कर 16,970 करोड़ रुपये हो गई। लेकिन हवाई अड्डों का चार्ज 41% बढ़ने, विमानों के किराये व मेंटेनेंस का खर्च 29.6% बढ़ने और ईंधन खर्च 13% बढ़ने से एयरलाइन अपनी आय से मुनाफा निकालने में असफल रही और दो साल के अंतराल के बाद एक बार फिर घाटे में आ गई। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के कारण जेट ईंधन की कीमतों में पिछले कुछ महीनों में काफी उतार-चढ़ाव दिखा है, इसका असर अब कंपनियों के वित्तीय परिणामों पर भी दिखने लगा है।
