उत्तरकाशी: अपर यमुना वन प्रभाग के अंतर्गत गुलाबी कांठा ट्रेक मार्ग पर वन विभाग की उच्च हिमालयी गश्त के दौरान खरसू (हिमालयी ओक) प्रजाति का एक अत्यंत विशालकाय और दुर्लभ वृक्ष मिलने से क्षेत्र में उत्साह का माहौल है।
15 मई 2026 को कंडोला थाच के ऊपरी वन क्षेत्र में की गई गश्त के दौरान इस वृक्ष की पहचान की गई। प्रारंभिक माप में इसकी परिधि 6.83 मीटर दर्ज की गई है, जबकि इसका व्यास लगभग 210 से 220 सेंटीमीटर बताया जा रहा है। वन विभाग के अनुसार यह खरसू प्रजाति का अब तक सामने आए सबसे विशाल वृक्षों में से एक हो सकता है, और इसके विश्व रिकॉर्ड की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
गश्त का नेतृत्व प्रभागीय वनाधिकारी रविन्द्र पुंडीर ने किया, जिसमें अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। वन विभाग ने इस वृक्ष के वैज्ञानिक परीक्षण और आधिकारिक सत्यापन के लिए भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (एफआरआई), देहरादून सहित विशेषज्ञ संस्थानों से संपर्क शुरू कर दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार खरसू ओक 2100 से 3500 मीटर की ऊँचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाने वाला महत्वपूर्ण सदाबहार वृक्ष है, जो जल संरक्षण, मृदा स्थिरता और पारिस्थितिक संतुलन में अहम भूमिका निभाता है। इतने बड़े आकार का वृक्ष मिलना अत्यंत दुर्लभ माना जा रहा है।
वन विभाग का कहना है कि वैज्ञानिक अध्ययन के बाद इसकी वास्तविक आयु, पारिस्थितिक महत्व और प्रजातीय विशेषताओं की पुष्टि की जाएगी। यदि दावे सही साबित होते हैं, तो यह वृक्ष न केवल भारत बल्कि विश्व स्तर पर अपनी प्रजाति का सबसे बड़ा रिकॉर्ड भी बना सकता है।
