देहरादून नगर निगम में ठेकेदार ने सड़क को सिर्फ कागजों पर बनाकर पूरी पेमेंट ले ली. जानिए कैसे.
देहरादून: नगर निगम देहरादून एक बार फिर विवादों में घिर गया है। इस बार मामला ऐसा है जिसने निगम की कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि वार्ड 41, इंद्रपुरम के राज एंक्लेव में एक ऐसी सड़क “बना दी गई”, जो जमीन पर आज तक बनी ही नहीं लेकिन भुगतान पूरा हो चुका है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, 125 मीटर और 175 मीटर, दो सड़कों के निर्माण का प्रस्ताव था। 125 मीटर की सड़क कागजों में 140 मीटर दिखाकर पेमेंट ले लिया गया, जबकि 175 मीटर की सड़क बन ही नहीं पाई। हैरानी की बात तो यह है कि मौके पर सीसी सड़क निर्माण का बोर्ड तक टांग दिया गया, जिसमें 2024–25 में कार्य पूर्ण होने का दावा किया गया है।
इस पूरे कथित घोटाले में लगभग 20 लाख रुपये की पेमेंट ठेकेदार को जारी की गई बताई जा रही है। कॉलोनीवासियों का आरोप है कि भुगतान चुनाव के दौरान ही निपटा दिया गया।
कॉलोनीवासियों के गंभीर आरोप
रमेश चंद्र मिश्रा का आरोप है कि अधूरे कार्य का पेमेंट नियमों के विरुद्ध कराया गया, और जिस ठेकेदार को भुगतान किया गया वह पूर्व पार्षद आशा भाटी का बेटा है, जिस वजह से कार्रवाई “आनन-फानन” में की गई।
निवासी एसबी त्यागी के मुताबिक, मामले की शिकायत स्थानीय विधायक से लेकर नगर आयुक्त तक की जा चुकी है।
पूर्व पार्षद आशा भाटी की सफाई
पूर्व पार्षद आशा भाटी ने सभी आरोपों को खारिज किया। उनका कहना है कि वर्तमान पार्षद बबीता रानी के पति लोगों को भड़का रहे हैं। भाटी के अनुसार, 175 मीटर सड़क की धनराशि कहीं और स्थानांतरित कर दी गई थी, जिसकी जानकारी बोर्ड को दी जा चुकी थी।
अपने बेटे को ठेका मिलने पर उन्होंने जवाब दिया—
“अगर वो ठेकेदार है और उसे टेंडर मिला है तो इसमें गलत क्या है?”
नगर निगम की प्रतिक्रिया
नगर आयुक्त नमामि बंसल के अनुसार, बोर्ड की पूर्व बैठक में इस सड़क निर्माण का प्रस्ताव पास हुआ था, लेकिन बाद में कार्य योजना अनौपचारिक रूप से बदल दी गई, जबकि इसका कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ।
अब जांच हो रही है कि—
कार्य किसके आदेश पर शिफ्ट किया गया?
भुगतान किस प्रक्रिया से हुआ?
औपचारिक कार्य आदेश क्यों नहीं बने?
