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देहरादून में 10 स्थानों पर भूकंप मॉक ड्रिल, जिला प्रशासन ने परखी आपदा प्रबंधन की तैयारी

जिलाधिकारी की निगरानी में चला रेस्क्यू ऑपरेशन, 10 से अधिक स्थानों पर भूकंप से जुड़े हालातों का किया गया सटीक अभ्यास

देहरादून: भूकंप की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों की वास्तविक तैयारी परखने के लिए देहरादून जिले में शनिवार को व्यापक स्तर पर भूकंप मॉक ड्रिल आयोजित की गई। सुबह 9:30 बजे काल्पनिक रूप से 6.3 तीव्रता का भूकंप आने की सूचना प्रसारित की गई, जिसके बाद विभिन्न स्थानों पर जानमाल के नुकसान और लोगों के मलबे में दबे होने की सूचनाएं कंट्रोल रूम को दी गईं। थानों और चौकियों में लगे इमरजेंसी सायरन बजाकर लोगों को सतर्क किया गया।

जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम (IRS) सक्रिय किया गया। मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने एनआईसी स्थित कंट्रोल रूम से राहत और बचाव कार्यों की कमान संभाली और सभी घटनास्थलों की निगरानी करते रहे। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी पूरे ऑपरेशन को लाइव मॉनिटर किया।

देहरादून में कोरोनेशन अस्पताल, आईएसबीटी, पैसिफिक मॉल, महाराणा प्रताप स्टेडियम, आराघर विद्युत उपकेंद्र, दिलाराम स्थित जल संस्थान सहित कुल 10 स्थानों पर मॉक ड्रिल की गई। कोरोनेशन अस्पताल में इमरजेंसी वार्ड क्षतिग्रस्त दिखाते हुए 20 लोगों के दबे होने की स्थिति बनाई गई, जिनमें से 17 को रेस्क्यू किया गया। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय कालसी में मलबे में फंसे 18 बच्चों को सुरक्षित निकाला गया।

स्पोर्ट्स ग्राउंड में हाई टेंशन लाइन की चपेट में आने से तीन लोगों की काल्पनिक मृत्यु और पांच घायलों का रेस्क्यू किया गया। एमडीडीए कॉलोनी में 100 लोगों के दबे होने की सूचना पर 60 घायलों को अस्पताल भेजा गया। आराघर विद्युत गृह में आग लगने की स्थिति में चार लोगों को सुरक्षित निकाला गया। सेलाकुई औद्योगिक क्षेत्र में क्लोरीन गैस लीक होने की स्थिति दर्शाते हुए 100 से अधिक मजदूरों को बचाया गया। ऋषिकेश में टीएचडीसी के पास फंसे लोगों को एम्स में भर्ती कराया गया।

मॉक ड्रिल समाप्ति के बाद सीडीओ ने सभी नोडल अधिकारियों को निर्देश दिया कि रेस्क्यू कार्य के दौरान सामने आई खामियों को दूर करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि वास्तविक आपदा की स्थिति में राहत और बचाव कार्य अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किए जा सकें। उन्होंने कहा कि पूर्वाभ्यास न केवल सामरिक तैयारी को मजबूत करता है, बल्कि विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय भी स्थापित करता है।

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