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नन्दा की तीनों डोलियां चौथे पड़ाव पर पहुंचीं, श्रद्धालुओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों से किया भव्य स्वागत

चमोली: श्री नन्दा राजराजेश्वरी बड़ी जात यात्रा के तहत सिद्धपीठ कुरूड़ से कैलाश यात्रा पर निकली नन्दा देवी की तीनों उत्सव डोलियां अपने-अपने यात्रा मार्गों पर चौथे पड़ाव पर पहुंच गई हैं। यात्रा मार्ग में पड़ने वाले गांवों और कस्बों में श्रद्धालुओं ने मां नन्दा की डोलियों का भव्य एवं पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। इस दौरान भक्तों ने काकड़ी, मुगरी, कलेऊ, खाजा समेत स्थानीय उत्पाद और अन्य सामग्री भेंट स्वरूप अर्पित कर पूजा-अर्चना की तथा मनौतियां मांगीं।

दशोली परगना की नन्दा देवी की उत्सव डोली मंगलवार को द्वादशी पर्व पर नन्दानगर के काण्डई गांव स्थित चौथे पड़ाव पर पहुंची। बुधवार को पूजा-अर्चना और भेंट चढ़ाने के बाद यात्रा अगले पड़ाव के लिए रवाना हुई। करीब 11:30 बजे काण्डई से यात्रा ने प्रस्थान किया।

यात्रा काण्डई से खलतरा, मोटा और चाका होते हुए करीब 15 किलोमीटर की दूरी तय कर देर शाम सेमा गांव पहुंची। यहां श्रद्धालुओं ने उत्साह और गर्मजोशी के साथ नन्दा देवी की डोली का भव्य स्वागत किया। इस दौरान पूरा यात्रा मार्ग नन्दामय नजर आया और श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।

यात्रा के साथ मंदिर कमेटी कुरूड़ के अध्यक्ष सुखवीर सिंह रौतेला, पुजारी मुंशी चंद्र गौड़, दिनेश गौड़, राजेंद्र प्रसाद गौड़, गोविंद गौड़, प्रकाश गौड़, जनार्दन गौड़, कमेटी के वीरेंद्र बिष्ट सहित अन्य यात्री चल रहे हैं।

बुधवार को दशोली की नन्दा डोली सेमा से वैरासकुंड, इतमोली और दुबड़खेत होते हुए अपने पांचवें पड़ाव मटेई गांव पहुंचेगी।

वहीं, बधाण पट्टी की मां नन्दा राजराजेश्वरी की उत्सव डोली भी अपने तीसरे पड़ाव उस्तोली से आगे बढ़कर सरपाणी और लाखी होते हुए चौथे पड़ाव भेटी गांव पहुंच गई है। यात्रा के दौरान जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा पारंपरिक विधि-विधान से मां नन्दा का स्वागत और पूजा-अर्चना की जा रही है।

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