देहरादून और नैनीताल में मौजूद ‘राजभवन’ को अब ‘लोक भवन’ के नाम से जाना जाएगा.
देहरादून/नैनीताल: उत्तराखंड में राजभवन का नाम बदलकर अब आधिकारिक रूप से ‘लोक भवन’ कर दिया गया है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) की स्वीकृति और केंद्र सरकार की अनुमति के बाद यह बदलाव प्रभावी हो गया है। बुधवार को देहरादून स्थित राजभवन के मुख्य द्वार पर नई नेम प्लेट स्थापित की गई, जिस पर ‘लोक भवन’ अंकित है। इसी क्रम में नैनीताल स्थित राजभवन का नाम भी बदलकर ‘लोक भवन’ किया जाएगा।
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने इस अवसर पर कहा कि संविधान में ‘लोक’ यानी जनता को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। लोक ही राष्ट्र की शक्ति और लोकतंत्र की आत्मा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ‘लोक भवन’ उत्तराखंड के नागरिकों के लिए आशा, संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जनसेवा का केंद्र बनेगा। राज्यपाल ने कहा कि यह भवन प्रशासनिक प्रतिष्ठान का प्रतीक भर नहीं, बल्कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक की आकांक्षाओं और विश्वास का घर है। उनका कहना था कि हमारा संकल्प है कि लोक भवन, ‘लोक के लिए, लोक के साथ और लोक के समर्पण में’ कार्य करेगा।
25 नवंबर को भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा अनुमोदन पत्र जारी होने के बाद राजभवन सचिव रविनाथ रमन ने इसकी औपचारिक अधिसूचना जारी की। सरकार के अनुसार, यह बदलाव जनकल्याण पर केंद्रित शासन और अधिक लोकतांत्रिक प्रशासनिक स्वरूप की दिशा में उठाया गया कदम है।
ब्रिटिश शासनकाल की परंपरा के तहत नैनीताल को कभी अंग्रेज अधिकारियों की ‘समर कैपिटल’ के रूप में जाना जाता था। 1900 के दशक की शुरुआत में यह स्थान गर्मियों में प्रशासनिक गतिविधियों का मुख्य केंद्र रहता था। वर्ष 2000 में उत्तराखंड राज्य गठन के बाद नैनीताल राजभवन राज्यपाल का आधिकारिक ग्रीष्मकालीन आवास बना। यहां कई महत्वपूर्ण बैठकें, निर्णय और विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की मेजबानी होती रही है। अब नए नामकरण के साथ इस ऐतिहासिक भवन को नई पहचान और व्यापक जन-सरोकार की दिशा में जोड़ा गया है।
