राजधानी नहीं, जाम की पहचान बनता देहरादून
देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में यातायात जाम अब अस्थायी समस्या नहीं, बल्कि स्थायी चुनौती बनता जा रहा है। सप्ताहांत, छुट्टियों और सामान्य कार्यदिवसों—हर स्थिति में शहर की प्रमुख सड़कों पर वाहनों की रफ्तार थमी हुई नजर आती है। बाहरी इलाकों में बने नए हाईवे और एक्सप्रेसवे जहां तेज यात्रा का अनुभव कराते हैं, वहीं शहर की सीमा में प्रवेश करते ही वाहन जाम की चपेट में आ जाते हैं।
शहरवासी हों या बाहर से आने वाले पर्यटक, दोनों ही देहरादून की यातायात व्यवस्था को लेकर असंतोष जताते नजर आ रहे हैं। स्थिति यह हो गई है कि समय पर कार्यालय, विद्यालय या अस्पताल पहुंचना भी चुनौती बन चुका है।
प्रमुख सड़कों पर दिनभर जाम

शहर की मुख्य सड़कों की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। राजपुर रोड, जिसे शहर की सबसे महत्वपूर्ण और चौड़ी सड़कों में गिना जाता है, वहां सुबह से रात तक यातायात का दबाव बना रहता है। कार्यालय समय में वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। सिग्नलों के पास अतिक्रमण और अव्यवस्थित पार्किंग से हालात और गंभीर हो जाते हैं।
इसी तरह कौलागढ़–बल्लीवाला–आईएसबीटी मार्ग पर यातायात का अत्यधिक दबाव देखा जा रहा है। जीएमएस रोड, बल्लूपुर चौक और कमला पैलेस तिराहे पर बिना यातायात पुलिस की मौजूदगी के वाहनों का निकलना कठिन हो जाता है।
आईएसबीटी क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित
आईएसबीटी के आसपास की सड़कों पर जाम की समस्या सबसे गंभीर बनी हुई है। अनियंत्रित ऑटो-विक्रम और ई-रिक्शा, अवैध पार्किंग तथा बसों का सड़क पर खड़ा रहना यहां की प्रमुख समस्याएं हैं। प्रतिबंधों के बावजूद सार्वजनिक परिवहन के वाहन सड़क पर रुक जाते हैं, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो जाता है।
सहस्रधारा–रायपुर रोड और परेड ग्राउंड मार्ग पर भी सुबह और शाम के समय 10 से 15 मिनट तक वाहनों का रुकना आम बात हो गई है।
संकरी सड़कों पर बढ़ते वाहन
घंटाघर–चकराता रोड–प्रेमनगर मार्ग पर सड़क चौड़ीकरण नहीं होने के कारण स्थिति और जटिल हो गई है। यहां वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जबकि सड़क क्षमता सीमित बनी हुई है। पीक ऑवर में एक किलोमीटर का सफर तय करने में 30 से 40 मिनट तक का समय लग रहा है।
वहीं हरिद्वार बाईपास–जोगीवाला क्षेत्र में हाईवे की रफ्तार शहर में प्रवेश करते ही थम जाती है, जिससे लंबा जाम लग जाता है।
मसूरी मार्ग पर पर्यटन दबाव
देहरादून–मसूरी मार्ग शहर का सबसे अधिक दबाव झेलने वाला मार्ग बन चुका है। सप्ताहांत और पर्यटन सीजन में यहां कई किलोमीटर लंबा जाम लगना सामान्य हो गया है।
सामान्य दिनों में 40–50 मिनट का सफर जाम के दौरान तीन से चार घंटे तक खिंच जाता है।
लाइब्रेरी चौक, हाथीपांव, भट्टाफाल और मसूरी डायवर्जन के पास यातायात की गति बेहद धीमी रहती है। किसी वाहन के खराब होने पर स्थिति और गंभीर हो जाती है।
सैलानी पूछ रहे: “सड़कें कहां हैं, जाम ही जाम क्यों?”
दिल्ली, एनसीआर, पंजाब और यूपी से आने वाले पर्यटक अक्सर यही सवाल करते दिखते हैं—
“हाईवे तो शानदार था, लेकिन शहर में रास्ता कहां गया?”
धूप में फंसे चेहरे, लंबी कतारें और बढ़ता तनाव उनकी यात्रा का सारा मजा किरकिरा कर देता है।
वहीं, शहरवासियों के लिए हालात और भी पीड़ादायक हैं—
बच्चों को स्कूल छोड़ने में लगने वाला समय, अब दून से हरिद्वार पहुंचने जितना हो गया है।
योजनाएं कागज पर, हकीकत सड़कों पर गायब
प्रशासन की ओर से मल्टीलेवल पार्किंग, स्मार्ट सिग्नल और सार्वजनिक परिवहन के पुनर्गठन की योजनाएं प्रस्तावित की गई हैं, लेकिन इनका प्रभाव फिलहाल सीमित नजर आ रहा है। ट्रैफिक प्रबंधन और सड़क इंजीनियरिंग में सुधार की जरूरत महसूस की जा रही है।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यातायात दबाव को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में हालात और बिगड़ सकते हैं। देहरादून आज उस मोड़ पर खड़ा है, जहां यातायात सुधार केवल सुविधा नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुका है।
