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यूपी से डीएलएड कर उत्तराखंड में शिक्षक बने अभ्यर्थियों की जांच, जिलों से मांगा गया रिकॉर्ड

देहरादून: उत्तराखंड में शिक्षक भर्ती के दौरान दूसरे राज्यों से डीएलएड (डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन) प्रशिक्षण लेने वाले अभ्यर्थियों की शैक्षिक और निवास संबंधी अर्हताओं की जांच शुरू होने जा रही है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने वर्ष 2020 से 2025-26 तक हुई भर्तियों में शामिल ऐसे शिक्षकों का जिलेवार ब्योरा सभी जिलों से मांगा है।

शिक्षा निदेशालय के अनुसार, खास तौर पर उत्तर प्रदेश से डीएलएड प्रशिक्षण प्राप्त कर उत्तराखंड के राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्त हुए शिक्षकों की पात्रता का सत्यापन किया जाएगा। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

मामले में निवास प्रमाणपत्र को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, कुछ अभ्यर्थियों ने दूसरे राज्यों के स्थायी निवास के आधार पर डीएलएड प्रशिक्षण प्राप्त किया और बाद में उत्तराखंड का स्थायी निवास या मूल निवास प्रमाणपत्र बनवाकर राज्य में शिक्षक भर्ती के लिए आवेदन किया।

प्रारंभिक शिक्षा निदेशक कुंवर सिंह रावत के मुताबिक, वर्ष 2020-21, 2021-22, 2024-25 और 2025-26 की भर्तियों में उत्तर प्रदेश से डीएलएड करने वाले चयनित अभ्यर्थियों की अर्हताओं की जांच की जाएगी। इसके लिए जिलों से संबंधित शिक्षकों का रिकॉर्ड जुटाया जा रहा है।

निदेशक ने बताया कि मामले को लेकर उत्तर प्रदेश के संबंधित अधिकारियों से भी बातचीत की जा रही है, ताकि डीएलएड प्रशिक्षण के दौरान अभ्यर्थियों के निवास और अन्य पात्रताओं से जुड़ी जानकारी का सत्यापन किया जा सके।

जांच के बाद यदि किसी अभ्यर्थी की पात्रता में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

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