आज से चैत्र नवरात्रि आरंभ हो चुका है और यह 17 अप्रैल राम नवमी तक चलेगा। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। हिंदू धर्म में अभिजीत मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। अभिजीत मुहूर्त में किया गया कार्य और पूजा बहुत ही शुभ माना जाता है। कलश स्थापना का सबसे अच्छा मुहूर्त सुबह 11 बजकर 58 मिनट से लेकर 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगा।दुर्गाजी के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री को सफेद और शुद्ध भोग्य खाद्य पदार्थ पसंद हैं। इसीलिए पहले नवरात्रि को मां शैलपुत्री को प्रसन्न करने के लिए सफेद चीजों का भोग लगाया जाता है। अगर घर परिवार को निरोगी जीवन और स्वस्थ शरीर चाहिए तो मां को गाय के शुद्ध घी से बनी सफेद चीजों का भोग लगाएं
हिंदू धर्म में नवरात्रि के पर्व का विशेष महत्व होता है। नवरात्रि पर देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। एक वर्ष में चार बार नवरात्रि का पर्व आता है। जिसमें से दो सामान्य और दो गुप्त नवरात्रि होती हैं। दो सामान्य नवरात्रि में पहली चैत्र माह में आने वाली नवरात्रि, दूसरी आश्विन माह में मनाई जाने वाली शारदीय नवरात्रि। इन दोनों ही नवरात्रि पर गृहस्थ लोग देवी दुर्गा की पूजा, उपासना, व्रत और उपवास रखते हैं। जबकि साल में दो गुप्त नवरात्रि भी आती है जिसमें दस महाविद्यायों के लिए साधनाएं की जाती है। ये गुप्त नवरात्रि माघ और आषाढ के महीने में आती हैं। इस नवरात्रि को तंत्र-मंत्र से जुड़े लोग देवी दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए साधनाएं करते हैं नवरात्रि के नौ दिनों में मां के नौ रूपों की आराधना की जाती है। भक्त माता को तरह-तरह के भोग लगाकर माता को प्रसन्न करते हैं। लेकिन धार्मिक मान्यता के अनुसार नवरात्रि के नौ दिनों में नौ देवियों को उनके पसंद के अनुसार भोग लगाने से देवी अत्यंत प्रसन्न होती हैं और सभी मनोकामनाओं को पूरा करती है। घर में सुख-संपदा की वृद्धि होती है।
आज से चैत्र शुक्ल प्रतिपदा और विक्रम संवत 2081 आरम्भ हो गया है और इसी दिन से नौ दिन के नवरात्रि शुरू हो रहे हैं। मां दुर्गा की पूजा से हमेशा लाभ होता है लेकिन नवरात्रि के दौरान देवी की पूजा अधिक फलदायी एवं कल्याणकारी होती है। नवरात्रि के नौ दिनों में देवी दुर्गाका नौ रूपों की विशेष पूजा आराधना का महत्व होता है। ये नौ देवियां हैं- मां शैलपुत्री, मां ब्रह्मचारिणी, मां चंद्रघंटा, मां कूष्मांडा, मां स्कंदमाता, मां कात्यायनी, मां कालरात्रि, मां महागौरी और मां सिद्धि दात्री।
