- एसटीएफ एवं साईबर क्राईम पुलिस स्टेशन उत्तराखण्ड की संयुक्त कार्यवाही
- देहरादून के बसन्त विहार क्षेत्र में किया गया फर्जी अन्तराष्ट्रीय काल सेन्टर का खुलासा
- उत्तराखंड डीजीपी अशोक कुमार ने टीम को बीस हजार रुपये का इनाम और प्रशस्ति पत्र देने की घोषणा की है
देहरादून| उत्तराखंड एसटीएफ(STF) और साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन(Cyber Crime Police station) की बड़ी कार्रवाई में राजधानी के वसंत विहार में चल रहे फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर(fake international call center) का भांडाफोड़ हुआ है. शातिर साइबर ठग विदेशों में रह रहे रिटायर्ड सिटिजंस को वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (Voice Over Internet Protocol) कॉल कर उनसे उनका Social Security Number(SSN) नम्बर (जैसा कि भारत में आधार कार्ड नम्बर है) पता कर उनकी निजी जानकारी लेने के बाद अलग-अलग तरीकों से ठगी कर रहे थे. बता दें कि VOIP से कॉल करके किसी भी देश का लोकल नंबर ही स्क्रीन पर आता है जिसके बाद ये ठग कभी नकली अधिकारी बनकर, कभी बीमा एजेंट बनकर या गिफ्ट कार्ड का झांसा देकर अपने अकाउंट में डॉलर ट्रांसफर करवाते हैं. भारत में यही डॉलर रुपये में बदलवाकर महीने भर में ही करोड़ों की कमाई की जा रही थी.
ठगी के शिकार लोग विदेशों में होते हैं तो वे अपने लोकल एरिया में शिकायत दर्ज करवाते हैं. ये शिकायतें अधिकतर मामलों में भारत की लॉ एंड इंफोर्समेंट एजेंसी(Law and Enforcement agency) तक पहुंच ही नहीं पाती हैं. ऐसे में ये अपराधी लंबे समय तक जेल से बाहर रहने में कामयाब होते हैं. इस प्रकार कॉल सेन्टर भारत में केवल रात को ही संचालित होते है क्योंकि अमेरिका एवं अन्य यूरापियों देशों में उस समय दिन होता है. इस तरह के ठगी के मामलों से भारत देशों के लोगों की छवि भी धूमिल हो रही थी. देहरादून में इस तरह की गतिविधियों की सूचना मिलने पर एसटीएफ और साइबर क्राइम पुलिस की जॉइंट टीम बनाई गई थी. जिसमें एस0टी0एफ0 के अपर पुलिस अधीक्षक स्वन्त्रत कुमार एवं पुलिस उपाधीक्षक अकुंश मिश्रा के नेतृत्व में निरीक्षक पकंज पोखरियाल, उप निरीक्षक उमेश कुमार एवं DOT(Department Of Telecommunication) एवं साईबर पुलिस थाना देहरादून तथा थाना बसन्तबिहार की एक संयुक्त टीम शामिल थी.
दिल्ली से भी जुड़े हुए अपराधियों के तार
टीम ने 14 जनवरी की देर रात बसन्त विहार थाना क्षेत्र में क्वीन्स टावर पर फर्जी अन्तराष्ट्रीय कॉल सेन्टर में छापा मारा. कर्मचारियों से पूछताछ करने पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला. पुलिस के अनुसार पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया गया कि, हम लोग पहले दिल्ली में कार्य करते थे. बाद में हम लोग हमारे सीनियर जो कि, दिल्ली व नोएडा में रहते हैं उनके द्वारा हमें प्रदान किये गये डेटाबेस के आधार पर हम लोग देहरादून से इस कॉल सेन्टर से संयुक्त राज्य अमेरिका में निवासरत सीनियर सिटीजन एवं विकलांग व्यक्तियों को फोन करके उनके साथ इस प्रकार की धोखाधड़ी कर उनकी धनराशि अपने सीनियरों के खातों में ट्रान्सफर करवाते हैं.
राजधानी के अंदर चल रहे इतने बड़े स्तर पर साइबर क्राइम के मामले में STF और साइबर क्राइम पुलिस की टीम को पकड़ने में साइबर टीम को बड़ी सफलता हाथ लगी है. पिछले कुछ समय में एसटीएफ की टीम और साइबर क्राइम की टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए इस तरह की बड़े स्तर परह चल रहे ठगों पर लगाम लगाने में काफी हद तक सफलता पाई है.
पकड़े गये अभियुक्तगण आयुष्मान मल्होत्रा व अन्य से पूछताछ पर यह तथ्य प्रकाश में आये कि, उनके मुख्य सहयोगी उनको जो डेटाबेस उपलब्ध कराते हैं जिस पर उनको एक निर्धारित लक्ष्य दिया जाता है जो कि, उनको पूरा करना होता है जिस पर कार्य करने पर उनको एक निर्धारित वेतन व कमीशन दिया जाता है तथा अपने मुख्य सहयोगियों से वो लोग व्हाटसअप ग्रुप के माध्यम से जुडे हैं जिसके माध्यम से उनको डेटाबेस, स्क्रिप्ट व आडियो मिलते हैं कि, उनको किस प्रकार से लोगों से वार्तालाप करनी है. अभियुक्तगणों से पूछताछ में कई करोड़ रुपयों की धनराशि का अवैध लेनदेन की बात भी प्रकाश में आई हैं. जिससे निकट भविष्य में दिल्ली में निवासरत घटना के अन्य मास्टरमाईन्डों द्वारा संचालित किये जा रहे पूरे गिरोह का भी भण्डाफोड़ हो सकता है.
