भारत में निर्मित स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) तेजस और एलसीएच प्रचंड की लोकप्रियता पूरी दुनिया में लगातार बढ़ रही है। इसे बनाने वाली कंपनी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) का कहना है कि एलसीए ‘तेजस’ अपनी कैटेगरी में बेहतरीन लड़ाकू विमान होने की वजह से विदेशी खरीदारों में इसे खरीदने को लेकर काफी रुचि पैदा हुई है। एचएएल की कई देशों से इसे खरीदने को लेकर बातचीत चल रही है और जल्द ही पांच-छह देश इसे खरीदने को लेकर इच्छुक हैं। एचएएल ने हाल ही में गुयाना को डॉर्नियर-228 एयरक्राफ्ट भी डिलीवर किए हैं।
फिलीपींस के अलावा नाइजीरिया ने भी तेजस और प्रचंड के अलावा लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (एलयूएच) और एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएच) ‘ध्रुव’ में रुचि दिखाई है। 2023 में, नाइजीरिया ने भारत के साथ एक बिलियन अमेरिकी डॉलर के रक्षा सौदों को मंजूरी दी। नाइजीरियाई प्रतिनिधिमंडल ने एयरक्राफ्ट का डेमो देखा था, लेकिन अभी भी उन्हें उड़ाना बाकी है
एचएएल के चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर सीबी अनंतकृष्णन ने उम्मीद जताई है कि स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस को लेकर बड़ा निर्यात ऑर्डर मिलने की अधिक उम्मीद है। उन्होंने कहा जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेजस में उड़ान भरी है, उसके बाद से दुनियाभर के देशों का ध्यान तेजस ने खींचा है, जिससे इसके निर्यात में और बढ़ोतरी मिलने की उम्मीद है। एक साक्षात्कार में सीबी अनंतकृष्णन ने कहा कि पांच-छह देशों ने रुचि दिखाई है। अर्जेंटीना के साथ इस पर अभी भी बातचीत चल रही है। फिलीपींस के साथ बातचीत अंतिम चरण में है। मिस्र के साथ भी हम चर्चा कर रहे हैं और नाइजीरिया के साथ बातचीत सकारात्मक है।
