यह उस समय की बात है जब यहां देवी-देवता (Gods) नहीं थे। बाबर,जौनसार,पाशि बिल,देवधार आदि इलाकों में राक्षसों (Demons) की मनमानी होती थी। यहां के लोग राक्षसों के भय से परेशान रहते थे। पांडव (Pandvas) के यहां से जाने के बाद राक्षस निर्भय हो गए थे। कुछ राक्षसों का तो पांडव ने वध कर दिया था बचे हुए राक्षसों को चार मासू और चार वीरों ने मारा। इसलिए यहां के लोग चार मासू को मानते हैं और इनकी पूजा करते हैं।
विद्या दत्त उनियाल
निवासी-बमण गांव (जौनसार)
न्यूज डेस्क| एक राक्षस किरमिर नाम का था,जो मैंद्रथ नामक स्थान के एक तालाब में रहता था। वह हर रोज गांव से एक आदमी को ले जाता था। गांव वालों ने राक्षस से तय किया कि हम तुम्हें सातवें रविवार को खलियान पकाया हुआ चावल एक बकरी देंगे और छठे महीने इसके साथ एक आदमी भी देंगे। राक्षस मान गया। इस प्रकार गांव के कई लोग उस राक्षस के भोजन हुए। मैंद्रथ नामक गांव में एक हुणा भाट नाम का ब्राह्मण रहता था। उसके सात लड़के थे,जिनमें से वह छ:लड़के राक्षस के भोजन के लिए दे चुका था,सिर्फ एक ही लड़का बाकी बचा था इसका नाम सुनाक था। हुणा भाट की पत्नी का नाम कैलावती था।
एक दिन कैलावती घड़ा लेकर जल लेने पुरुनाउथ नामक तालाब में गई जहां वह किरमिर राक्षस रहता था।जैसे ही कैलावती ने घड़ा जल में डुबोई वैसे ही जल भरने की आवाज आई। राक्षस ने सोचा कि मेरे भोजन के लिए कोई आया है इसलिए हाथ जल से बाहर डाल दिया। उस हाथ में लंबे लंबे बाल थे। कैलावती उस हाथ को देखकर डर गई,उसके मुंह से अचानक मासू नाम का शब्द निकला।
मासू का नाम सुनते ही घड़े में से सीटी की आवाज आई। उस घड़े से शेडकुडिया वीर बोल रहा था। शेडकुडिया वीर बोला कि हे ब्राह्मणी क्या तू इस राक्षस से डर रही है। कैलावती इधर-उधर देखने लगी कि मुझसे बात कौन कर रहा है। शेडकुडिया वीर बोला कि हे ब्राह्मणी तू इधर उधर क्या देख रही है। मैं इस घड़े से मासू देवता का वीर शेडकुडिया वीर बोल रहा हूं। कैलावती समझ गई कि यह कोई देवता है,जो कि रक्षा करना चाहता है। इसलिए भय छोड़कर बोली कि हे देवता आप हमारी रक्षा करें, यह राक्षस पूरे गांव को परेशान करता है। मेरे छ:बालक यह राक्षस अपना भोजन बना चुका है। अब एक ही बालक शेष है। कृपया कर आप मेरे परिवार और मेरे गांव वासियों की रक्षा करें। शेडकुडिया वीर कहने लगा कि हे ब्राह्मणी यदि मैं तुम्हारे परिवार और गांव की रक्षा करूं तो मुझे क्या इनाम देगी कैलावती ने कहा कि उसे यहां का राज्य मिलेगा और सभी लोग उसकी पूजा करेंगे।
इतनी बात सुनते ही शेडकुडिया वीर बोला अच्छा तू अपने पति को कश्मीर भेजना वहां एक तालाब में चार वीर व चार महासू रहते हैं और अन्य देवता भी रहते हैं। जो बहुत शक्तिशाली हैं। यदि वह सभी लोग यहां आ गए तो यह राक्षस आसानी से मारा जाएगा।
अब जितना जल्दी हो सके अपने पति को भेज देना। कैलावती ने कहा कि मैं आज ही उसे कश्मीर भेज दूंगी। कैलावती घड़ा वहीं छोड़कर घर को भागी, घर पहुंचते-पहुंचते उसकी जुबान बंद हो गई।वह देवकला में थी। उसे देखकर सभी गांव के लोग दंग रह गए कि आज कैलावती को क्या हो गया है जो बोल भी नहीं रही है। कैलावती का पति हुणा भाट उस समय खेत में काम पर गया था। तभी किसी ने जाकर उसे बताया कि तुम्हें जल्दी घर बुलाया है। तुम्हारी पत्नी को आज ना मालूम क्या हो गया है। हुणा भाट जल्दी घर पहुंचा देखा की पत्नी का बुरा हाल था। अपनी विद्या से उसने मालूम किया कि इसमें कोई देवता लगा है। इसलिए उसके सिर पर बकरा घुमाया जिससे उसकी जुबान खुल गई और वह होश में आ गई।
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वह अपने पति से कहने लगी की नात आज मुझे एक देवता ने अपना चमत्कार दिखाया और कहा कि तुम अपने परिवार, गांव वासियों के प्राण बचाने के लिए और इस राक्षस को मारने के लिए अपने पति को कश्मीर (Kashmir) भेजना वहां एक तालाब में बहुत देवता रहता है जो बहुत शक्तिशाली है। वह इस राक्षस को मारकर हम सभी के प्राण बचाएंगे।
हुणा भाट बोला कि है ब्राह्मणों में इस अवस्था में कश्मीर कैसे जा सकता हूं। मेरे प्राण तो उधर ही छूट जाएंगे,लौटकर वापस भी नहीं आ सकूंगा। कैलावती बोली कि हे नाथ, अब बुढ़ापा भी आ गया है।मरना तो एक ना एक दिन है ही।यदि आप मासू के नाम पर उधर ही स्वर्ग सिधार जायेंगे,तो ठीक हो होयेगा। ब्राह्मण पत्नी की बात मानकर कश्मीर जाने के लिए तैयार हो गया।
उस समय आज की तरह सड़के नहीं थी पैदल चलना पड़ता था। आने जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। हुणा भाट जैसे तैसे कश्मीर पहुंच गया।
हुणा भाट जब कश्मीर पहुंचा तब उनकी चार मासू देवताओं से भेंट हुई। तब वाशिक देवता ने पूछा हे ब्राह्मण तुम कहां के रहने वाले हो और यहां आने का कष्ट क्यों किया।इसके पश्चात हुणा भाट इस प्रकार कहने लगे कि हे देवों मैं मैंद्रथ का रहने वाला हूं। मेरे क्षेत्र में कोई देवता नहीं है और ना किसी राजा का डर है।डर है,तो एक राक्षस का जिसके लिए छठे महीने एक खलियान,एक आदमी और एक बकरी देनी पड़ती है। मैं उस राक्षस से छुटकारा पाने के लिए आपकी शरण में आया हूं। अब आप मेरी रक्षा करें और मेरे क्षेत्र में चलने का कष्ट करें।
चारों मासू देवता चलने के लिए तैयार हो गए। चालदा मासू ब्राह्मण को एक फूलों की टोकरी देकर कहने लगे कि तुम इसे ले जाकर इन फूलों को किसी कुएं में डालना सात दिन तक होम जंगम करना, सात कुंवारे लड़के,सात कुंवारे बछड़े से उपवास करवाना, सातवें दिन उन कंवारे लड़कों और बछडों से हल चलवाना। सोने का हल होना चाहिए।
अब हुणा भाट फूलों की टोकरी लेकर चलने लगा,तो शेडकुडिया वीर ने देखा कि इसे तो पहुंचते-पहुंचते कई दिन लग जाएंगे। इसलिए उसे वापस बुला लिया और उसे अपने हाथ पर बिठाकर फूंक मारा और अपनी शक्ति से मैंद्रथ पहुंचा दिया।
ब्राह्मण ने सोने का हल बनवाया, सात बच्चों को उपवास रखवाया, होम करवाते-करवाते परेशान हो गया था। इसलिए छठे ही दिन हल चलवा दिया।इसलिए अपशकुन हुआ।
हल का फल लगते ही चार वीर निकले और अपनी अपनी जगह बैठ गए। उसके बाद वाशिक देवता निकला।हल का फल उनके नेत्र में लगा वह अपने स्थान में बैठ गए। उसके बाद बोठा मासू प्रकट हुए। हल का फल उसके घुटने में लगा। वह भी अपने स्थान में बैठे। उसके बाद पवासी मासू पैदा हुआ।हल का फल उनके कान से टकराया।वह भी अपने स्थान में बैठ गए। चालदा मासू देवता भी निकले और उन्होंने भी अपना स्थान ग्रहण किया।
उसके बाद चार देवी बलयाणी प्रकट हुई,काली, भैंयो, नारसिंघ,पशुपतिनाथ,कुकुर सी, पीर, रगंवीर,जंगवीर, उदयवीर आदि देवता प्रकट हुए।
जब सब देवता प्रकट हो गए,तो चार मासू ने ब्राह्मण से पूछा कि हे ब्राह्मण अब हमें बता की मनुष्य की बलि लेने वाला वह राक्षस कहां है।तब हुणा भाट चार मासू देवताओं को उस जगह ले गया जहां वह राक्षस रहता था। इन देवताओं ने इस राक्षस का वध कर दिया। राक्षस के अंत के साथ-साथ लोगों के दुखों का भी अंत हो गया,तभी से इन चार मासू देवताओं को पूजा जाने लगा।
वाशिक देवता ने कहा कि हनोल मुझे दो। मैं वहां वास करुंगा।,इसमें बोठा मासू ने कहा कि हे भाई हनोल मुझे दो क्योंकि मेरी टांग में हल का फल चुभ गया है। मैं चल फिर भी नहीं सकता हूं। छोटे भाई की बात सुनकर वाशिक देवता मान गया। इसके बदले में एक वर्ष तक आपकी मेहमानी करुंगा। तब हनोल बोठा मासू को दे दी।
वाशिक देवता को बावर देवधार दे दी गई। और पवासी देवता को पाशिनोल मिली। जब चालदा मासू के लिये कोई क्षेत्र नहीं बचा। इसलिए वह नाराज होकर वापस कश्मीर जाने को तैयार हुआ। वाशिक देवता ने उसे नाराज देखकर अपना छत्र उसे दे दिया और कहा कि बारह वर्ष तक मेरे मेहमान रहोगे, आगे तुम अपने लिए और इलाकों में भी जगह बनाते रहना।
तभी पवासी देवता ने कहा तुम बारह वर्ष तक पाशिनोल में मेरे मेहमान रहोगे। बोठा मासू बोला कि बारह वर्ष के बाद आर पार जाते समय एक रात आपकी मेहमानी मैं भी करुंगा। तभी चालदा मासू खुश हुआ।
कपला वीर वाशिक देवता के साथ गया और अखरेत नामक स्थान पर स्थापित हो गया। क्यलू वीर बोठा मासू के साथ गया। क्लास वीर पवासी मासू के साथ देवती देने गया।
शेडकुडिया वीर चालदा मासू के साथ गया। इस वीर को चारों देवताओं ने वजीर भी मान लिया।
ऐसे ही सब देवताओं को कहीं न कहीं भेज दिया। शेष सब देवता बोठा मासू के साथ हनोल गये। वहां ही सब सुखी से रहने लगे और उनकी पूजा होने लगी।
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