अब्बास के पिता मुख्तार अंसारी की 28 मार्च को दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी। पिता की मौत पर अब्बास को जनाजे में शामिल होने के लिए हाईकोर्ट में याचिका डाली गई, लेकिन अनुमति नहीं मिली। अब फातिहा कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई और सुप्रीम कोर्ट ने 10, 11 और 12 अप्रैल के लिए पेरोल स्वीकृत की। अब्बास अंसारी अपने पिता की मौत से 28 मार्च की रात तक अंजान था अगले दिन सुबह 8.30 बजे जेल प्रशासन ने जब खबर दी तो वह बिलख उठा। कुछ देर तक फूट-फूटकर रोया था। जेल प्रशासन ने कारागार में उसके स्वजन के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर उसकी बात कराईं थी। उसने करीब बीस मिनट तक बात की थी और इस दौरान वह रोया भी था।अब सुप्रीम कोर्ट ने उसे पिता की कब्र पर जाकर फातिहा पढ़ने की इजाजत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब्बास अंसारी को पुलिस हिरासत में कासगंज जेल से गाजीपुर लाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। लिहाजा, अभी से सुरक्षा सख्त कर दी गई है। जेल में नियमों के अनुसार ही परिवार के लोगों को मिलने दिया जाएगा।यहां से 13 अप्रैल को वापस कासगंज जेल के लिए भेजा जाएगा। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, गाजीपुर जिला जेल में अब्बास अंसारी को बैरक नंबर दस में रखा जाएगा। यह वही बैरक है, जिसमें सांसद अफजाल अंसारी को रखा गया था। हालांकि अफजाल जमानत पर छूट चुके हैं। अब्बास अंसारी को हाई सिक्योरिटी में रखा जाएगा। सीसी कैमरे से निगरानी की जाएगी, जिसे लेकर जेल प्रशासन ने पहले से ही तैयारी कर ली है। चार नवंबर 2022 से अब्बास जेल में है। उसे फरवरी 2023 से चित्रकूट से कासगंज की पचलाना जेल भेजा गया। अब्बास पर गाजीपुर कोतवाली, मऊ, लखनऊ और चित्रकूट में आठ मुकदमे दर्ज हैं।
अब्बास अंसारी के पिता मुख्तार अंसारी की मौत हार्टअटैक से हुई थी। हालांकि परिवार के लोग मौत को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं। दो भाइयों में बड़ा अब्बास अंसारी पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाया था।मऊ सदर से विधायक और मुख्तार का बड़ा बेटा अब्बास अंसारी 17 महीने बाद गाजीपुर आया है। वह आज पिता की कब्र पर फातिहा पढ़ने जाएगा। फिर दो दिन जिला जेल में रहेगा। जिस बैरक में अफजाल अंसारी थे, उसमें ही अब्बास को रखा जाएगा।
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