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सच्चाई उजागर करने वाले पत्रकारों पर मुकदमे दर्ज करने का ट्रेंड क्यों ?

देहरादून| विवादित जमीन के मामले पर देहरादून में दो पत्रकारों पर किया गया रंगदारी का मुकदमा तूल पकड़ता जा रहा है. कोतवाली डालनवाला के नालापानी चौकी में दस जनवरी सोमवार को एहसान मसूद निवासी प्लेसमैंट वैली, राजपुर रोड ने तहरीर दी कि दो पत्रकार उन्हें रंगदारी के लिए धमका रहे हैं. मामला कैनाल रोड पर एकता ऐवेन्यू लेन न. 1 में एक खाली प्लॉट का है जिसे कॉलोनीवासियों द्वारा विवादित बताया जा रहा है. शिकायतकर्ता के अनुसार जमीन उसके नाम है और पत्रकारों ने मीडिया में इसे कब्जे की बताकर जानबूझकर मुद्दा बनाने की धमकी दी और इसके एवज में फिरोती मांगी. जबकि पत्रकार पक्ष का कहना है कि वह कॉलोनी के निवासियों द्वारा अवैध कब्जा किए जाने की सूचना पर वहां गए थे.

इस प्रकार की खबर प्रकाशित करने पर मीडियाकर्मियों के ऊपर दर्ज हुए मुकदमे का यह पहला मामला नहीं है. इससे पूर्व में भी भूमाफिया, दबंगों एवं सामाजिक कुकृत्यों की खबरें उजागर करने वाले पत्रकारों को इस प्रकार की समस्याओं से रू-ब-रू होना पड़ा है. वर्तमान सरकार के इस कार्यकाल में पत्रकारों के उत्पीड़न के इस तरह के कई मामले प्रकाश में आए हैं. जिसमें बिना जांच पड़ताल किए आनन-फानन में पुलिस ने पत्रकारों के विरुद्ध मामले दर्ज किए हैं. लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर बिना जांच पड़ताल के मुकदमे दर्ज होने से पुलिसिया कार्रवाई और सरकार की मंशा पर प्रश्नचिन्ह इंगित होता है. वहीं दूसरी ओर सिर्फ किसी खबर की सच्चाई पता करने गए पत्रकारों को मुकदमों में फंसा देना आम बात हो चली है. अपने काले कारनामों पर पर्दादारी रखने के लिए सरकारी तंत्र का भरपूर इस्तेमाल करने वाली सरकारें मीडिया की स्वतंत्रता के अधिकारों का हनन कर रही हैं. ताजा मामले में यही प्रक्रिया दोहराई गई प्रतीत होती है. इस पूरे प्रकरण को लेकर मामले की सच्चाई,जानने के लिए जब हमारी टीम मौके पर पहुंची तब सबसे हैरान कर देने वाली बात यह लगी कि वहां पर पहले से ही दो पुलिसकर्मी मौजूद थे और शिकायतकर्ता मौके से नदारद थे. हमारे संवाददाता ने नालापानी चौकी प्रभारी से फोन कर शिकायतकर्ता का पक्ष जानने के लिए संपर्क नंबर मांगा, खबर लिखे जाने तक शिकायतकर्ता का संपर्क चौकी प्रभारी ने उपलब्ध नहीं कराया गया है जिससे दूसरे पक्ष की तरफ से कोई बयान उपलब्ध नहीं है.
ठीक इसी मामले की तर्ज पर कुछ समय पहले ही उसी मीडिया संस्थान के एक और पत्रकार पर भी राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया था. कवरेज करने गए पत्रकारों पर मुकदमा दर्ज करने की परंपरा सामान्य प्रक्रिया हो चली है. मीडिया की आवाज को दबाने के लिए गरीब पत्रकारों पर मुकदमा दर्ज कर उन्हें आर्थिक और मानसिक रूप से तोड़ने के लिए यह पैंतरा इस्तेमाल किया जा रहा है. परंतु दमनकारी नीति अपनाने वाले ये लोग यह भूल गए है्ं कि एक ईमीनदार, स्वतंत्र स्वायत्त पत्रकार के लिए रुकना, झुकना और डरना मना है. आखिर जब पत्रकारों का रंगदारी/ब्लैकमेलिंग का मुकदमा दर्जद कराया था और जमीन पर कोई विवाद नहीं था ऐसी स्थिति में पत्रकारों द्वारा किसी साफ-पाक व्यक्ति को इस प्रकार धमकी देने का औचित्य नहीं बनता है. वह भी ऐसे मामले में जब पत्रकार विवादित जमीन पर सोसाइटी के सदस्यों की शिकायत पर पहुंचे हों.
गौरतलब है कि आज सुबह दस बजे एकता ऐवेन्यू लेन न. वन पर जब हमारी टीम पहुंची तब वहां दो पुलिस कर्मियों के अतिरिक्त जमीन को विवादित बताने वाले कई कॉलोनी वासी एवं मीडियाकर्मी उपस्थित थे.

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