- डाकपत्थर बैराज (Dakpathar bairage) की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा है मामला
- उत्तर प्रदेश सरकार (Uttar Pradesh Government) कर चुकी थी क्षेत्र को प्रतिबंधित
- कई अधिकारियों के जगाने पर भी सरकार जागने को तैयार नहीं !
देहरादून| हजारों करोड़ रुपए की परियोजना डाकपत्थर बैराज पर यू.जे.वी.एन.एल. (UJVNL) की यमुना जल विद्युत परियोजना (Yamuna Hydropower project) साल 1970 से बिजली उत्पादन (Electricity production) कर रही है. संवेदनशील और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट होने के कारण इस परियोजना में डाकपत्थर क्षेत्र को उत्तर प्रदेश सरकार ने 1989 में प्रतिबंधित इलाका (Prohibited area) घोषित कर दिया था. इसके लिए बैराज की सुरक्षा में गार्ड (Security guard) भी तैनात किए गए थे.
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जीएमवीएन (GMVN) के पूर्व उपाध्यक्ष और जन संघर्ष मोर्चा (Jan Sangharsh Morcha) के उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने आरोप लगाया है कि डाकपत्थर बैराज को राजद्रोही तत्वों, खनन माफियाओं (Mafia) और आतंकवादियों (Terrorists) से बचाने के मामले में अपर महानिदेशक अभिसूचना एवं सुरक्षा, पुलिस महानिदेशक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, जिलाधिकारी और खुद संबंधित विभाग बैराज की सुरक्षा व्यवस्था को ठीक करने के लिए कार्यवाही की मांग कर चुका है, लेकिन जीरो टोलरेंस नामक सरकार जागने को तैयार नहीं है.
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नेगी ने बताया कि एक – डेढ़ साल पहले बैराज की संवेदनशीलता के चलते 2-8 की प्रशिक्षित गार्ड तैनाती की संस्तुति की गयी थी, लेकिन आज तक कोई तैनाती नहीं हुई. बैराज लगभग 50 वर्ष पुराना है और उसमें दरारें भी आ गयी हैं.
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इसके अतिरिक्त परियोजना आर्टिफिशियल सीक्रेट एक्ट 1923 के तहत प्रतिबन्धित है. नेगी ने कहा कि अगर बैराज को क्षति पहुॅंचती है तो कई वर्षों तक बिजली उत्पादन ठप्प हो जायेगा. सरकार को करोड़ों-अरबों रूपये का राजस्व का चूना लग सकता है.
मोर्चा ने सरकार को आगाह करते हुए बयान दिया कि प्रदेश में घट रही घटनाओं से सबक लेते हुए बाद में लाशों पर राजनीति करने के बजाए समय रहते उक्त परियोजना को बचाने की दिशा में काम करे.
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