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आयुष चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने का प्रयास

वैश्विक स्तर पर आयुष चिकित्सा प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए 5 देशों में एकेडमिक चेयर (शैक्षणिक पीठ) खोले गए हैं.

आयुष के बारे में अकादमिक आदान-प्रदान, अनुसंधान और जन जागरूकता को बढ़ाने के उद्देश्य से भारत ने बांग्लादेश, ऑस्ट्रेलिया, मॉरीशस, लातविया और मलेशिया में एकेडमिक चेयर (अकादमिक पीठ) शुरू की है.

मंगलवार को संसद में इसकी जानकारी देते हुए आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि विदेशी संस्थानों में आयुष पीठ की पहल, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयुष चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने के भारत के व्यापक प्रयासों का एक हिस्सा है.

जाधव ने राज्यसभा में कहा, ‘विदेशी विश्वविद्यालयों में आयुष पीठों की स्थापना अंतरराष्ट्रीय सहयोग, अनुसंधान को बढ़ावा देने और आयुष के लाभों को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीति है. पीठ का उद्देश्य आम तौर पर आयुष के बारे में अकादमिक आदान-प्रदान, अनुसंधान और जन जागरूकता को बढ़ावा देना है, जिससे मेजबान देश में इसकी मान्यता और स्वीकृति में योगदान मिलता है.’

उन्होंने कहा कि आयुष पीठ की स्थापना या तो द्विपक्षीय प्रयासों से होती है या किसी विदेशी संस्थान की आयुष पीठ की मेजबानी करने की इच्छा से होती है. उन्होंने कहा, ‘इसके बाद विदेशी विश्वविद्यालय और आयुष मंत्रालय के तहत आने वाले संस्थान के बीच एक चेयर एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाते हैं.

इसके बाद, अपेक्षित योग्यता वाले आयुष विशेषज्ञ का चयन किया जाता है. इसके बाद चेयर को विदेशी विश्वविद्यालय में प्रतिनियुक्त किया जाता है. आयुष मंत्रालय वेतन और यात्रा लागत प्रदान करता है, जबकि मेजबान विदेशी विश्वविद्यालय चेयर को किराए-मुक्त आवास और स्थानीय आतिथ्य प्रदान करता है. चेयर को शुरू में एक वर्ष के लिए प्रतिनियुक्त किया जाता है और तीसरे वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है.

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