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आरटीआई की आड़ में चल रही दलाली पर लगे रोक: मोर्चा

नेगी ने कहा – जिस तरह फर्जी बाबाओं के खिलाफ ‘कालनेमि ऑपरेशन’ चलाया गया, उसी तर्ज पर RTI के दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार चलाए सघन अभियान
RTI के नाम पर खुला ब्लैकमेलिंग बाजार।
नेगी बोले – फर्जी आरटीआई एक्टिविस्टों पर भी चले ‘कालनेमि ऑपरेशन’
RTI के दुरुपयोग पर चिंता
जन संघर्ष मोर्चा ने की दलालों की जांच और कार्रवाई की मांग.

विकासनगर: जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं गढ़वाल मंडल विकास निगम के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने सरकार से अपील की है कि जिस प्रकार प्रदेशभर में फर्जी बाबाओं के खिलाफ ‘ऑपरेशन कालनेमि’ चलाया गया है, उसी तर्ज पर सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) का दुरुपयोग कर दलाली व ब्लैकमेलिंग करने वाले व्यक्तियों पर भी सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

नेगी ने कहा कि RTI एक शक्तिशाली लोकतांत्रिक हथियार है, जिसका उद्देश्य जन सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर पारदर्शिता लाना और आमजन को न्याय दिलाना है। लेकिन कुछ लोग इसका दुरुपयोग कर व्यक्तिगत लाभ, ब्लैकमेलिंग और अवैध वसूली का जरिया बना चुके हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे दलाल सामान्य नागरिकों को भी नहीं बख्शते, जो बामुश्किल दो कमरे का मकान बनाते हैं। उन्हें RTI के डर से धमकाकर पैसों की मांग की जाती है, जबकि बड़े बिल्डरों और रसूखदारों पर ये हाथ तक नहीं डालते।

नेगी ने कहा कि ये दलाल अक्सर RTI की पहली अपील तक ही सीमित रहते हैं, क्योंकि सूचना आयोग तक पहुंचने की हिम्मत उनमें नहीं होती। यदि आयोग ने पूछ लिया कि “सूचना का मकसद क्या है”, तो उनका खेल वहीं खत्म हो सकता है। इसी डर से वे कभी उच्च स्तर की सुनवाई में नहीं जाते।

उन्होंने कहा कि कई दलाल ऐसे हैं जिन्होंने जनता से लाखों-करोड़ों रुपये की ठगी की है, और उनका मुख्य निशाना निचले स्तर के अधिकारी और कर्मचारी होते हैं, जिन्हें वे आसानी से अपनी जाल में फंसा लेते हैं। यदि समय रहते इन पर अंकुश न लगाया गया, तो यह प्रवृत्ति एक सामाजिक महामारी का रूप ले सकती है।  नेगी ने बताया कि जन संघर्ष मोर्चा ने इस समस्या को लेकर मुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक, मुख्य सूचना आयुक्त सहित संबंधित अधिकारियों को कई बार ज्ञापन सौंपा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

मोर्चा की मांग है कि सरकार ऐसे ब्लैकमेलरों के खिलाफ कालनेमि ऑपरेशन जैसा अभियान चलाए और उनकी गतिविधियों व संपत्तियों की जांच कर उन्हें कानूनी शिकंजे में लाया जाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।

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