हल्द्वानी: उत्तराखंड वानिकी प्रशिक्षण अकादमी (एफटीआई) हल्द्वानी में शनिवार को 35वां दीक्षांत समारोह आयोजित हुआ। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के 37 प्रशिक्षणार्थियों ने 18 माह की कठिन ट्रेनिंग पूरी करने के बाद वन क्षेत्राधिकारी (रेंजर) के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली। पासिंग आउट परेड में शामिल होकर सभी रेंजर्स को प्रमाणपत्र दिए गए। दीक्षांत समारोह के मौके पर उनके परिजन भी मौजूद रहे और अपने नौनिहालों के रेंजर बनने पर गर्व महसूस किया।
परेड की सलामी और प्रमाणपत्र वितरण
दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि अपर प्रमुख वन संरक्षक विवेक पांडेय ने परेड की सलामी ली और रेंजरों को प्रमाण पत्र वितरित किए। उन्होंने प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले अधिकारियों को जंगलात की नौकरी के महत्व और चुनौतियों के बारे में विस्तार से बताया। पांडेय ने कहा कि वन क्षेत्राधिकारी का दायित्व बेहद अहम होता है, क्योंकि विषम परिस्थितियों में भी जंगल की रक्षा करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि प्रकृति संरक्षण का यह अवसर एक बड़ी जिम्मेदारी है, जिसे पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाना होगा।
18 महीने की कठिन ट्रेनिंग के बाद सफलता
अपर प्रमुख वन संरक्षक ने कहा कि 18 महीने की कठिन और अनुशासित ट्रेनिंग के बाद यह कैडेट्स आज वन क्षेत्राधिकारी के रूप में पास आउट हुए हैं। ट्रेनिंग के दौरान इन्हें जंगल की सुरक्षा, तकनीकी ज्ञान और आपदा जैसी परिस्थितियों से निपटने की विधियों की जानकारी दी गई। उन्होंने विश्वास जताया कि यहां से मिली तकनीकी शिक्षा के आधार पर ये रेंजर मध्य प्रदेश के जंगलों में बेहतर कार्य कर सकेंगे।
प्रमाण पत्र मिलने के बाद नए रेंजरों ने अपनी टोपियां हवा में उछालकर खुशी का इजहार किया। परिजनों ने भी अपने बच्चों की सफलता पर गर्व जताया और बैज लगाकर उन्हें सम्मानित किया। इस मौके पर परिजनों की आंखों में खुशी और गर्व की झलक साफ दिखाई दी।
गौरतलब है कि वर्ष 2002 में उत्तराखंड राज्य गठन के बाद हल्द्वानी स्थित वानिकी प्रशिक्षण अकादमी को उच्चीकृत कर प्रशिक्षण कार्य शुरू किया गया। वर्ष 2009 में महिला वनरक्षकों की भर्ती के बाद यहां महिलाओं के लिए भी प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई। वर्तमान में अकादमी में जेआईसीए परियोजना के सहयोग से आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। अब यहां उत्तराखंड के अलावा अन्य राज्यों से भी वनरक्षक प्रशिक्षण प्राप्त करने आते हैं।
मध्य प्रदेश के जंगलों की कमान संभालेंगे रेंजर
इस बार प्रशिक्षण प्राप्त कर पास आउट हुए सभी 37 कैडेट्स मध्य प्रदेश के जंगलों की जिम्मेदारी संभालेंगे। समारोह में मौजूद अधिकारियों ने विश्वास जताया कि ये युवा रेंजर जंगलों की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
