Udayprabhat
uttrakhandदेहरादून

देहरादून को असुरक्षित शहरों में शामिल करने पर महिला आयोग व पुलिस ने जताई आपत्ति

देहरादून में महिलाओं की आबादी: 9 लाख
सर्वे में शामिल: मात्र 400 महिलाएँ
डायल 112 पर अगस्त माह में शिकायतें: 12,354
इनमें महिलासंबंधी: 2,287 (18%)
छेड़खानी से जुड़ी शिकायतें: केवल 11 (1% से भी कम)
गौरा शक्ति एप पर पंजीकरण: 1.25 लाख
देहरादून जिले से पंजीकरण: 16,649

देहरादून: निजी सर्वे कम्पनी पी वैल्यू एनालिटिक्स द्वारा जारी “NARI-2025” रिपोर्ट में देहरादून को देश के 10 असुरक्षित शहरों में दिखाए जाने पर राज्य महिला आयोग और पुलिस ने कड़ी आपत्ति जताई है। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह सर्वे न तो राष्ट्रीय महिला आयोग और न ही किसी सरकारी एजेंसी द्वारा कराया गया है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी रिपोर्ट को निजी कम्पनी की स्वतंत्र पहल बताया है, जो तथ्यों की बजाय व्यक्तिगत धारणाओं पर आधारित है।

Women’s Commission and Police Object to Dehradun Being Listed Among Unsafe Cities:

रिपोर्ट 31 शहरों में CATI और CAPI पद्धति से की गई, जिसमें देहरादून की नौ लाख महिला आबादी के मुकाबले केवल 400 महिलाओं से टेलीफोनिक बातचीत कर निष्कर्ष निकाला गया। पुलिस के अनुसार यह सैंपल साइज नगण्य है। देहरादून में अगस्त माह में डायल 112 पर दर्ज 12,354 शिकायतों में महिलाओं से संबंधित शिकायतें केवल 18% थीं, जिनमें छेड़खानी के मामले 1% से भी कम रहे। पुलिस का औसत रिस्पांस टाइम 13.33 मिनट दर्ज किया गया। शहर में 14 हजार से अधिक सीसीटीवी कैमरे, गौरा चीता पेट्रोलिंग, पिंक बूथ और महिला हेल्प डेस्क जैसी व्यवस्थाएँ लगातार सक्रिय हैं। अधिकारियों ने कहा कि देहरादून में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ और पर्यटक सुरक्षित वातावरण में रहते हैं। एनसीआरबी का डेटा भी बताता है कि देहरादून का अपराध दर मेट्रो शहरों से काफी कम है। उन्होंने कहा कि नीतिगत निर्णयों के लिए सर्वेक्षण पद्धति सशक्त होनी चाहिए, न कि केवल धारणाओं पर आधारित।

Leave a Comment