देहरादून: उत्तराखंड में हर साल मानसून का मौसम प्राकृतिक आपदाओं का खतरा लेकर आता है। भूस्खलन, सड़क अवरोध, बाढ़ और भवनों को होने वाले नुकसान का असर बच्चों की शिक्षा पर भी पड़ता है। इस स्थिति को देखते हुए राज्य शिक्षा विभाग ने अब “मानसून वेकेशन” लागू करने की योजना बनाई है, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और पाठ्यक्रम समय पर पूरा हो।
उत्तराखंड में बीते दो महीनों में उत्तरकाशी, चमोली, देहरादून, बागेश्वर और रुद्रप्रयाग जैसे जिलों में मौसम अलर्ट के कारण प्राथमिक से माध्यमिक स्तर तक के स्कूल लंबे समय तक बंद रहे। धराली, थराली, नंदनगर, रायपुर, डोईवाला और जखोली जैसे क्षेत्रों में बच्चों को स्कूल जाने का अवसर ही नहीं मिला। इस मानसून में 1211 से अधिक स्कूलों को नुकसान हुआ है, जो पूरे राज्य में 1409 तक पहुंच गया। अधिकांश प्रभावित स्कूल प्राथमिक स्तर के हैं।
शिक्षा विभाग ने प्रभावित स्कूलों में पाठ्यक्रम समय पर पूरा कराने के लिए अतिरिक्त कक्षाओं और पढ़ाई के समय में वृद्धि की योजना बनाई है। निजी स्कूलों ने जहां ऑनलाइन कक्षाएं शुरू कर दी हैं, वहीं सरकारी स्कूलों में यह सुविधा सीमित है। कुछ शिक्षक अपनी व्यक्तिगत पहल पर भी छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
विभाग की प्रस्तावित योजना के अनुसार, मानसून सीजन में बच्चों को 10 दिन की छुट्टी दी जाएगी। इस अवधि की भरपाई गर्मी और सर्दियों की छुट्टियों में कटौती करके की जाएगी। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आपदा-प्रभावित प्रदेश के लिए यह कदम व्यावहारिक समाधान हो सकता है। इससे बच्चों को सुरक्षित माहौल मिलेगा और उनकी शैक्षणिक प्रगति बाधित नहीं होगी।
इस योजना पर अंतिम निर्णय विभागीय समीक्षा और कैबिनेट की मंजूरी के बाद होगा। अगर यह लागू होता है, तो यह भारत में आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों के लिए शिक्षा व्यवस्था में एक अनोखा प्रयोग साबित होगा। ऐसे कदम से न केवल बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि आपदा के समय पढ़ाई में निरंतरता भी बनी रहेगी।
