मानवी सजवान..
असम ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया, जिसकी आवाज सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि भावनाओं, संस्कृति और संवेदनाओं का प्रतीक थी। जुबिन गर्ग का नाम सुनते ही हर असमिया के मन में गर्व और प्रेम की लहर दौड़ जाती थी। उनकी गायकी में जो आत्मीयता और गहराई थी, वह केवल एक सच्चे कलाकार की देन थी। जुबिन गर्ग केवल एक गायक नहीं थे, बल्कि हर असमिया के लिए गर्व और प्रेरणा का स्रोत थे। उनके गीतों और मंचीय प्रस्तुतियों में जो भावनात्मक जुड़ाव था, वह दर्शकों के दिलों तक सीधे पहुँचता था। उनके चाहने वालों के लिए यह सिर्फ एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं, बल्कि उस आत्मीयता और भावना का खो जाना है, जिसे जुबिन ने अपने संगीत के माध्यम से सभी के साथ साझा किया। जुबिन ने हमें यह सिखाया कि संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि आत्मा और संस्कृति का प्रतिबिंब है। उनके गीतों में असम की मिट्टी की खुशबू, वहां की परंपरा और हर असमिया की भावनाएँ जीवित थीं। असम ने भले ही अपना एक सितारा खो दिया है, लेकिन जुबिन गर्ग की विरासत हमेशा जीवित रहेगी। उनकी आवाज, उनके गीत और उनकी यादें हर उस दिल में जिंदा रहेंगी जिसने कभी उनकी कला को महसूस किया। जुबिन गर्ग का जीवन और संगीत हमें हमेशा यह याद दिलाएंगे कि कला और भावनाएं कितनी शक्तिशाली होती हैं, और यह भावना हर असमिया के दिल में हमेशा जीवित रहेगी।

