देहरादून: जिलाधिकारी कार्यालय में लगने वाले जनता दरबार में शिकायतों पर आदेश तो जारी हो जाते हैं, लेकिन उन पर अमल नहीं हो रहा है। डीएम के निर्देशों के बावजूद कार्रवाई न होने से फरियादी लगातार दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। सोमवार को लगे जनता दरबार में भी कई ऐसे लोग पहुंचे, जिनकी शिकायतें लंबे समय से लंबित हैं और समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
सूत्रों के अनुसार, सोमवार को जिलाधिकारी सविन बंसल ने अपने कार्यालय में करीब 180 शिकायतों को सुना। इनमें अधिकांश मामले भूमि विवाद, पारिवारिक कलह और धोखाधड़ी से जुड़े थे। डीएम ने कई मामलों में तत्काल एक्शन लेने के निर्देश दिए, जबकि अन्य में विभागों को अग्रिम कार्रवाई के आदेश जारी किए गए। हालांकि, इन आदेशों पर वास्तविक कार्रवाई कब तक होगी, इसकी कोई जवाबदेही तय नहीं है।
जनता दरबार में पहुंची सुनीता धारिया नाम की महिला ने बताया कि एक व्यक्ति ने प्रोजेक्ट के नाम पर लाखों की ठगी की है। दो महीने से थानों और कार्यालयों के चक्कर काटने के बावजूद अब तक कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि वह तीसरी बार जिलाधिकारी के जनता दरबार में शिकायत लेकर पहुंचीं, लेकिन 27 अक्टूबर को दर्ज हुई एफआईआर पर अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया है।
वहीं, एक बुजुर्ग महिला ने राज्य आंदोलनकारी चिन्हिकरण की मांग को लेकर गुहार लगाई। उन्होंने नम आंखों से कहा कि 1994 में आंदोलन के दौरान उनके पति का निधन हो गया, लेकिन आज तक चिन्हिकरण नहीं हुआ। “उम्र निकल गई, लेकिन पहचान नहीं मिली,” उन्होंने दुख भरे स्वर में कहा।
फरियादियों का कहना है कि जनता दरबार में सुनवाई तो हो जाती है, लेकिन उसके बाद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। शिकायतों का फॉलोअप न होने से लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। जिलाधिकारी कार्यालय की ओर से दावा किया गया है कि सभी शिकायतों की ऑनलाइन और मैनुअल ट्रैकिंग की जा रही है, ताकि जल्द से जल्द निस्तारण हो सके।
