
उत्तराखंड विधानसभा के कर्मचारियों के धरने को आज पूरे 1 साल का समय हो गया है सभी कर्मचारी लगातार 365 दिनों से विधानसभा के सामने धरना प्रदर्शन कर रहे हैं पिछले वर्ष 19 दिसंबर 2022 को उन्होंने अपने धरने की शुरुआत की थी तथा आज तक उन कर्मचारियों को न्याय न मिलने के कारण आज भी वह उसी स्थान पर धरने पर बैठे हुए हैं, कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उन्हें पूरा न्याय नहीं मिलेगा वह इसी तरह से धरने पर बैठे रहेंगे। विधानसभा में बैकडोर से भर्तियां करने पर सवाल उठने पर स्पीकर ऋतु खंडूड़ी भूषण ने 3 सितंबर 2022 को पूर्व आईएएस अधिकारी डीके कोटिया की अध्यक्षता में तीन सदस्य विशेषज्ञ जांच समिति का गठन किया था। जांच समिति ने राज्य गठन से 2021 तक तदर्थ आधार पर की गईं नियुक्तियों की जांच कर 20 दिन के भीतर 22 सितंबर 2022 को विधानसभा अध्यक्ष को रिपोर्ट सौंप दी थी। समिति ने जांच में पाया कि तदर्थ आधार पर नियुक्तियां नियम विरुद्ध की गई हैं। समिति की रिपोर्ट पर विधानसभा अध्यक्ष ने 23 सितंबर को तत्काल प्रभाव से 2016 से 2021 तक की गईं कुल 228 नियुक्तियां को रद्द कर कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया था। इसके बाद कर्मचारी हाईकोर्ट गए तो वहां भी उन्हें निराशा मिली। वहीं, हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी कर्मचारियों की याचिका खारिज कर दी। स्पीकर ऋतु खंडूड़ी की भूमिका पर भी कर्मियों नें उठाए सवाल कर्मचारियों का कहना है की विधानसभा में 2016 के बाद वाले कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर वाहवाही लूटने वाली स्पीकर ऋतु खंडूड़ी सवालों के घेरे में हैं। उन्होंने कहा कि वह निजी कारणों से विधानसभा में 2016 से पहले के बैकडोर भर्ती वालों को बचाने का कार्य कर रही हैं।

उनके द्वारा हाईकोर्ट में काउंटर फाइल कर खुद कबूलनामा किया है। इसके बाद भी 2016 से पहले वालों को बचाने के लिए उन्होंने अब अपनी साख तक दांव पर लगा दी है। 2016 से पहले विधानसभा में अवैध रूप से भर्ती हुए कई कर्मचारी ऐसे हैं जिनकी विधानसभा में नियुक्ति बीसी खंडूड़ी के मुख्यमंत्री रहते हुईं। इसमें तत्कालीन सीएम बीसी खंडूड़ी के पर्यटन सलाहकार की बेटी सहित कई हाई प्रोफाइल लोगों के परिजन शामिल हैं।
जिस कार्यवाही को स्पीकर सत्य की जीत करार दे रहीं हैं वह एक अधूरा और झूठा सत्य है। खुद स्पीकर की ओर से बनाई डीके कोटिया समिति ने भी अपनी रिपोर्ट के नंबर 12 में साफ किया है कि राज्य गठन के बाद से लेकर अभी तक की सभी भर्तियां अवैध हैं।
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