Udayprabhat
Breaking Newsuttrakhandउत्तर प्रदेश

कांवड़ यात्रा मार्ग पर QR कोड अनिवार्यता पर विवाद, सुप्रीम कोर्ट ने यूपी और उत्तराखंड से मांगा जवाब- SC KANWAR DIRECTIVE

याचिका में कहा गया है कि सरकार का आदेश विक्रेताओं की धार्मिक और जातीय पहचान उजागर कर भेदभाव को बढ़ावा दे सकता है, जो निजता के अधिकार का उल्लंघन है।
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय मांगा गया, लेकिन याचिकाकर्ता पक्ष ने त्वरित सुनवाई की आवश्यकता बताई।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कांवड़ यात्रा मार्ग पर खाद्य विक्रेताओं को QR कोड स्टिकर लगाने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों से जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने राज्य सरकारों को एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई अगले मंगलवार को निर्धारित की।

यह याचिका शिक्षाविद अपूर्वानंद झा और अन्य द्वारा दाखिल की गई, जिसमें 25 जून को जारी उत्तर प्रदेश सरकार की प्रेस विज्ञप्ति को चुनौती दी गई है। इसमें कांवड़ मार्ग पर स्थित सभी भोजनालयों और स्टॉलों पर QR कोड प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया है, जिससे मालिकों की पहचान की जा सके।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत, चंदर उदय सिंह और हुजेफा अहमदी ने दलील दी कि यह आदेश संवेदनशील है क्योंकि कांवड़ यात्रा कुछ ही दिनों में समाप्त हो जाएगी। वहीं, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों की ओर से पेश वकील जतिंदर कुमार सेठी ने जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा।

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि QR कोड के जरिए मालिकों की धार्मिक और जातीय पहचान उजागर करना निजता के अधिकार का उल्लंघन है और यह भेदभावपूर्ण प्रोफाइलिंग को बढ़ावा देता है। याचिका में दावा किया गया है कि यह आदेश दुकानों, ढाबों और रेस्टोरेंट समेत सभी खाद्य प्रतिष्ठानों पर लागू किया गया है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष भी ऐसे ही आदेशों पर रोक लगाई थी, जब उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश सरकारों ने कांवड़ मार्ग पर विक्रेताओं से उनके नाम और कर्मचारियों की जानकारी प्रदर्शित करने को कहा था।

श्रावण मास के दौरान कांवड़ यात्री गंगा जल लेकर विभिन्न शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं। इस अवधि में कई श्रद्धालु मांसाहार और प्याज-लहसुन का सेवन भी त्याग देते हैं, जिससे भोजन की शुद्धता और पहचान को लेकर संवेदनशीलता बनी रहती है।

Leave a Comment