हाईकोर्ट ने मतदाता सूची की वैधता और ADM की योग्यता पर उठाए सवाल, राज्य सरकार से मांगा जवाब.
अंग्रेजी बोलने में असमर्थ ADM की कार्यक्षमता पर हाईकोर्ट ने उठाए सवाल, राज्य निर्वाचन आयुक्त और मुख्य सचिव को जांच का निर्देश.
सिर्फ परिवार रजिस्टर के आधार पर वोटर लिस्ट? हाईकोर्ट ने मांगी जांच रिपोर्ट, ADM की भूमिका भी संदेह में.
नैनीताल: नैनीताल हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान जिले के अपर जिलाधिकारी (ADM) की अंग्रेजी भाषा में अभिव्यक्ति की अक्षमता को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। अदालत ने राज्य निर्वाचन आयुक्त (SEC) और मुख्य सचिव को निर्देशित किया है कि वे यह जांच करें कि क्या एक ऐसा अधिकारी, जो धाराप्रवाह अंग्रेजी नहीं बोल सकता, प्रशासनिक दायित्वों को प्रभावी ढंग से निभाने के योग्य है या नहीं।
मामला मतदाता सूची के निर्माण से जुड़ी एक याचिका से संबंधित है, जिसमें यह प्रश्न उठाया गया था कि क्या केवल परिवार रजिस्टर के आधार पर नागरिकों का नाम वोटर लिस्ट में शामिल किया जाना वैध है? सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि कई स्थानों पर बूथ स्तर के अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर सिर्फ एक पारिवारिक प्रतिनिधि से जानकारी लेकर पूरे परिवार के नाम अस्थायी मतदाता सूची में दर्ज कर देते हैं। यदि उस सूची पर कोई आपत्ति नहीं आती, तो प्रविष्टियाँ अंतिम सूची में जोड़ दी जाती हैं — बिना किसी पहचान पत्र या अन्य वैध दस्तावेज के।
मुख्य न्यायाधीश रितेश कुमार श्रीवास्तव, न्यायमूर्ति आलोक महरा और न्यायमूर्ति नरेंद्र की खंडपीठ ने इस प्रक्रिया पर चिंता जताई और पूछा कि क्या नाम जोड़ते समय किसी प्रकार के वैध दस्तावेज संलग्न किए गए थे या नहीं। कोर्ट को बताया गया कि ऐसी कोई आवश्यकता नहीं रखी गई थी। इस उत्तर पर न्यायालय ने टिप्पणी की कि यदि यही प्रक्रिया पूरे राज्य में अपनाई जा रही है, तो इससे मतदाता सूची की वैधता पर गंभीर संदेह खड़े होते हैं।
इसी सुनवाई के दौरान नैनीताल के ADM कोर्ट में पेश हुए। जब उनसे कोर्ट ने अंग्रेजी में प्रश्न पूछे, तो उन्होंने जवाब हिंदी में दिया। इस पर न्यायालय ने उनकी अंग्रेजी भाषा की जानकारी के बारे में पूछा। ADM ने स्वीकार किया कि वे अंग्रेजी समझ सकते हैं लेकिन धाराप्रवाह बोलने में असमर्थ हैं। अदालत ने इस उत्तर को गंभीरता से लेते हुए कहा कि यदि कोई अधिकारी उच्च पद पर बैठा है, तो क्या उसके लिए अंग्रेजी भाषा में दक्षता अनिवार्य नहीं है?
कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयुक्त और उत्तराखंड के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे ADM की भाषाई क्षमता और उनके प्रशासनिक कार्यों पर इसके प्रभाव की जांच करें और यह सुनिश्चित करें कि क्या ऐसे अधिकारी राज्य के कार्यकारी पद पर प्रभावी कार्य कर सकते हैं।
इस मामले की अगली सुनवाई की तिथि 28 जुलाई, 2025 निर्धारित की गई है, जिसमें संबंधित अधिकारियों को रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है।
