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जम्मू कश्मीर को 6 साल बाद भी नहीं मिला राज्य का दर्जा, फारूक अब्दुल्ला ने केंद्र से पूछे सवाल- Abrogation Of Article 370

अनुच्छेद 370 हटाने के 6 साल बाद भी राज्य का दर्जा अधूरा
राज्यसभा चुनाव पर चुप्पी और बेरोजगारी पर जताई चिंता
भाजपा के ‘जश्न’ पर कसा तंज, बोले— उपलब्धि क्या है?

श्रीनगर:  जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A हटाए जाने को छह साल पूरे होने पर जहां केंद्र सरकार जश्न की तैयारी में है, वहीं नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा कब वापस मिलेगा?

एएनआई से बातचीत में अब्दुल्ला ने कहा, “केंद्र ने कहा था कि चुनाव के बाद राज्य का दर्जा बहाल कर दिया जाएगा। अब वे दो खाली विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की बात कर रहे हैं, लेकिन राज्यसभा की चार सीटों के चुनाव पर चुप क्यों हैं?” उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी समस्याएं उठाने का हक है, उन्हें संसद से दूर रखना लोकतंत्र का अपमान है।

भाजपा द्वारा अनुच्छेद 370 हटाने का जश्न मनाने की योजनाओं पर कटाक्ष करते हुए अब्दुल्ला ने पूछा, “भाजपा छह साल में क्या लेकर आई है? हमारे पढ़े-लिखे युवा बेरोजगार हैं, महंगाई चरम पर है, गरीब और गरीब हो रहे हैं। क्या यही उनकी उपलब्धि है?” उन्होंने दावा किया कि राज्य की हालत बद से बदतर हो गई है और केंद्र के पास जश्न मनाने का कोई ठोस कारण नहीं है।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को ‘भाजपा के वायसराय’ बताते हुए अब्दुल्ला बोले, “जम्मू-कश्मीर में सरकार है, पर असली सत्ता राजभवन में बैठे एक व्यक्ति के हाथ में है। अब बदलाव की ज़रूरत है। यह देश लोकतांत्रिक है, न कि शाही सल्तनत।”

घाटी में शांति की स्थिति पर फारूक अब्दुल्ला ने कहा, “शांति रातोंरात नहीं आती। पाकिस्तान और चीन जैसे ताकतवर पड़ोसी हैं। बातचीत ही एकमात्र रास्ता है, युद्ध नहीं।” कुलगाम मुठभेड़ पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने पूछा कि अगर आतंकवाद खत्म हो गया है, जैसा सरकार दावा करती है, तो फिर घाटी में मुठभेड़ें क्यों हो रही हैं?

अंत में उन्होंने कहा, “हम एक भ्रम में जी रहे हैं। हालात बदलने हैं तो हकीकत को स्वीकार कर बातचीत का रास्ता अपनाना ही होगा।”

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