पटना हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए शीर्ष अदालत ने कहा – संघ के सुचारू संचालन के लिए बाहरी दखल और आपसी राजनीति से बचना होगा.
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए अपने पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव को बिहार क्रिकेट संघ (Bihar Cricket Association) का लोकपाल नियुक्त कर दिया। यह नियुक्ति संघ के कुछ पदाधिकारियों की कथित अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई और संगठन के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।
न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। यह सुनवाई पटना उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर हुई, जिसमें एकल पीठ द्वारा उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश शैलेश कुमार सिंह को लोकपाल नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन बाद में खंडपीठ ने इस आदेश को रद्द कर दिया और बीसीसीआई को नया लोकपाल नियुक्त करने का निर्देश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह पूरा मामला लोकपाल की नियुक्ति से संबंधित है और इस पर बाहरी ताकतों या संघ के भीतर की खींचतान का असर नहीं होना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस नियुक्ति का उद्देश्य संघ में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना है।
पीठ ने कहा, “हम सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव को बिहार क्रिकेट संघ का लोकपाल नियुक्त करते हैं। दोनों पक्ष न्यायमूर्ति राव के साथ औपचारिक बैठक कर संघ के कार्यों पर चर्चा करेंगे।”
अदालत ने इस दौरान बीसीसीआई की भूमिका पर भी सवाल उठाया। पीठ ने टिप्पणी की, “हम समझ नहीं पा रहे हैं कि बीसीसीआई इस मामले में क्यों शामिल था। बिहार क्रिकेट संघ के लोकपाल की नियुक्ति से बीसीसीआई का कोई लेना-देना नहीं है।”
सुनवाई के दौरान बिहार क्रिकेट संघ का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने संघ के पूर्व सचिव आदित्य वर्मा की याचिका दायर करने की पात्रता पर सवाल उठाया। वहीं, वर्मा के वकील ने अदालत से अनुरोध किया कि वह एक लोकपाल नियुक्त करे।
इस पर पीठ ने तल्ख टिप्पणी की, “इन सभी प्रकार के संघों में गंदी राजनीति चल रही है और आप लोग देश की सर्वोच्च अदालत का कीमती समय बर्बाद कर रहे हैं।”
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला संघ में लंबे समय से चल रहे विवाद और कानूनी लड़ाई के बीच आया है। अब न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव की नियुक्ति से उम्मीद जताई जा रही है कि बिहार क्रिकेट संघ के अंदरूनी मसलों का निष्पक्ष और तेज समाधान होगा।
संघ के कई सदस्यों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से संगठन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। वहीं, आलोचकों का कहना है कि अगर आपसी राजनीति खत्म नहीं हुई, तो कोई भी लोकपाल बदलाव नहीं ला पाएगा।
अगला कदम होगा न्यायमूर्ति राव की अध्यक्षता में दोनों पक्षों की औपचारिक बैठक, जिसमें संघ के कामकाज और शिकायतों के निपटारे के लिए रोडमैप तय किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि लोकपाल का निर्णय अंतिम और बाध्यकारी होगा, ताकि खेल से जुड़े मामलों में कानूनी खींचतान के बजाय खेल भावना को बढ़ावा मिले।
