SUPREME COURT VERDICT ON STRAY DOGS.
सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को नोटिस
सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर पाबंदी जारी
देशभर में 31 लाख डॉग बाइट केस और 300 से अधिक मौतें चिंता का विषय
पशु प्रेमियों ने फैसले पर जताई नाराजगी, सुरक्षा को लेकर कोर्ट सख्त
नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत ने शुक्रवार को आवारा कुत्तों के मुद्दे पर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। तीन न्यायाधीशों की विशेष पीठ—जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया—ने कहा कि शेल्टर होम में रखे गए सभी आवारा कुत्तों को तुरंत छोड़ा जाए, सिवाय उन कुत्तों के जो बीमार हैं या आक्रामक व्यवहार करते हैं।
कोर्ट ने अपने 11 अगस्त के आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि सभी कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण के बाद उन्हें उसी क्षेत्र में वापस छोड़ा जाएगा। इस नियम को पूरे देश में लागू करने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर लगी रोक जारी रहेगी। इसके लिए निर्धारित स्थान चिन्हित किए जाएं, ताकि अव्यवस्था न फैले। यदि किसी ने नियम का उल्लंघन किया तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जन सुरक्षा और रेबीज के बढ़ते खतरे पर गंभीर चिंता जताई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को जानकारी दी कि वर्ष 2024 में देशभर से 31 लाख से अधिक डॉग बाइट केस दर्ज हुए, यानी प्रतिदिन लगभग 10,000 मामले। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023 में कुत्तों के काटने से 300 से अधिक मौतें हुईं। अदालत ने कहा कि बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर की स्थिति को विशेष रूप से गंभीर बताया और एनडीएमसी, एमसीडी तथा नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद की एजेंसियों को सड़कों को आवारा कुत्तों से मुक्त करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने चेतावनी दी कि इस कार्रवाई में बाधा डालने वाले किसी भी संगठन या समूह के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
हालांकि, इस फैसले से देशभर में पशु प्रेमियों के बीच नाराजगी की लहर दौड़ गई। कई संगठनों और व्यक्तियों ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बेजुबान जानवरों के अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। इन्हीं विरोधों के बाद मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने विशेष पीठ का गठन कर मामले की पुनः सुनवाई करवाई थी।
सुप्रीम कोर्ट का यह संशोधित आदेश अब पूरे देश में लागू होगा और उम्मीद की जा रही है कि इससे न केवल डॉग बाइट की घटनाओं में कमी आएगी बल्कि जन सुरक्षा और पशु अधिकारों के बीच संतुलन भी स्थापित हो सकेगा।
