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रामलीला मैदान में अभ्यर्थियों का हल्ला बोल, SSC परीक्षा की गड़बड़ियों पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई, कई हिरासत में

मानवी सज्वान..
भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल, अभ्यर्थियों की मांग – निष्पक्ष जांच और सिस्टमेटिक सुधार

नई दिल्ली:  कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ शनिवार से दिल्ली के रामलीला मैदान में धरने पर बैठे हजारों अभ्यर्थियों का गुस्सा देर रात पुलिस कार्रवाई के बाद और बढ़ गया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि उनके पास दो दिन तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति थी, बावजूद इसके पुलिस ने जबरन धरना खत्म कराया और कई छात्रों को हिरासत में ले लिया। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने तय समय के बाद भी मैदान खाली करने से इनकार किया, जिसके चलते कार्रवाई करनी पड़ी।

अभ्यर्थियों का आरोप – गैरकानूनी तरीके से हटाया गया

धरने पर बैठे छात्रों का कहना है कि 24 अगस्त की शाम 5 बजे के बाद अचानक रामलीला मैदान की बिजली काट दी गई। कई अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि सिविल ड्रेस में पहुंचे पुलिसकर्मियों ने अनुमति पत्र दिखाने के बावजूद उन्हें मैदान छोड़ने का दबाव बनाया। छात्रों का यह भी कहना है कि हटाए जाने के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया, जिससे कई लड़के-लड़कियों को चोटें आईं और कुछ अभ्यर्थियों के साथ दुर्व्यवहार भी हुआ।

किस बात से नाराज हैं अभ्यर्थी?

धरना दे रहे अभ्यर्थियों और शिक्षकों ने SSC प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जुलाई–अगस्त 2025 में आयोजित की गई कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं (CBT) में कई तरह की गड़बड़ियां हुईं। इनमें शामिल हैं –

बार-बार सर्वर डाउन होना और तकनीकी दिक्कतें

परीक्षा केंद्रों की बदहाल स्थिति

प्रश्नपत्र तक समय से उपलब्ध न होना

परीक्षा प्रबंधन में पारदर्शिता की कमी

छात्रों का कहना है कि इन खामियों के कारण लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लग गया है। जो अभ्यर्थी सालों मेहनत करके परीक्षा में बैठते हैं, उनका भरोसा प्रशासन पर से उठता जा रहा है।

अभ्यर्थियों की मांग

प्रदर्शन कर रहे उम्मीदवारों ने अपनी 3 प्रमुख मांगें रखी हैं –

1. परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शी जांच – सभी तकनीकी गड़बड़ियों और प्रशासनिक खामियों की निष्पक्ष जांच हो।

2. सिस्टमेटिक सुधार – परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए सख्त और स्थायी कदम उठाए जाएं।

3. शिकायत निवारण तंत्र – अभ्यर्थियों की समस्याओं का समय पर समाधान करने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाई जाए।

छात्रों का कहना है कि जब तक इन मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होगी, उनका संघर्ष जारी रहेगा।

भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता पर बड़ा सवाल

यह विरोध प्रदर्शन सिर्फ SSC तक सीमित नहीं है। हाल के वर्षों में रेलवे, टीचर भर्ती और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी बार-बार गड़बड़ियों के आरोप सामने आए हैं। इन घटनाओं ने लाखों छात्रों का भरोसा डगमगाया है, जो वर्षों की मेहनत के बाद एक स्थिर सरकारी नौकरी का सपना देखते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला केवल परीक्षा प्रबंधन का नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य से जुड़ा है।

फिलहाल, पुलिस की कार्रवाई और छात्रों की नाराजगी के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें जल्द नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। वहीं, सरकार और आयोग की ओर से अभी तक कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है।

रामलीला मैदान में हुआ यह विरोध केवल धरना-प्रदर्शन भर नहीं है, बल्कि यह उन लाखों युवाओं की आवाज है जो वर्षों से पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली की मांग कर रहे हैं। दिल्ली पुलिस की कार्रवाई ने इस मुद्दे को और गरमा दिया है। अब देखना होगा कि सरकार और SSC प्रशासन इस बढ़ते छात्र असंतोष को शांत करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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