काठमांडो में ‘जेन जी के बैनर तले स्कूली छात्रों समेत हजारों युवाओं ने संसद भवन के सामने एकत्र होकर किया प्रदर्शन.
काठमांडो: नेपाल में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाए जाने के विरोध में राजधानी काठमांडो और कुछ अन्य इलाकों में सोमवार को युवाओं ने हिंसक प्रदर्शन किया, जिसके दौरान 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि सैकड़ों लोग घायल हो गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
काठमांडो में हालात को नियंत्रित करने के लिए अधिकारियों को सेना को तैनात करना पड़ा। काठमांडो में ‘जेन जी’ के बैनर उले स्कूली छात्रों समेत हजारों युवा संसद भवन के सामने इकट्ठा हुए और प्रतिबंध को तुरंत हटाने की मांग करते हुए सरकार विरोधी नारे लगाए। नेपाली मीडिया के अनुसार इस हिसक प्रदर्शन में 19 लोगों की मौत हुई है। हालांकि, मौतों की आधिकारिक संख्या के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवाओं का प्रदर्शन उस समय हिसक हो गया जब कुछ प्रदर्शनकारी संसद परिसर में घुस गए, जिसके बाद पुलिस को भीड़ को तितर-वितर करने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले और रबर की गोलियों का इस्तेमाल करना पड़ा।
अस्पताल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए ‘हिमालयन टाइम्स’ अखबार ने बताया, काठमांडो में हुए प्रदर्शन में 19 लोगों की मौत हो गई। ‘हिमालयन टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताविक मृतकों में छह लोग ट्रॉमा सेंटर, तीन सिविल अस्पताल, तीन एवरेस्ट अस्पताल, एक काठमांडो मेडिकल कॉलेज और एक त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिग अस्पताल में है। न्यूज पोर्टल खबरहव ने बताया, ‘जेन जी आंदोलन में अब तक 19 लोगों की मौत हो चुकी है। नेपाल पुलिस ने कहा, दो सुरक्षाकर्मियों समेत सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। उनका इलाज वर्तमान में काठमांडो के सिविल अस्पताल में चल रहा है।
सैन्य अधिकारियों ने कहा कि स्थिति नियंत्रित करने के लिए सेना को तैनात किया गया है। हिंसा के बाद स्थानीय प्रशासन ने राजधानी के कई हिस्सों में कर्फ्यू लगा दिया। यह विरोध प्रदर्शन दूसरे शहरों में भी गया है। काठमांडो जिला प्रशासन ने संसद भवन के आसपास के क्षेत्रों में अशांति को रोकने के लिए अपराह्न 12:30 बजे से फैल रात 10:00 बजे तक निषेधाज्ञा लागू की। मुख्य जिला अधिकारी छवि लाल रिजाल ने एक नोटिस में कहा, प्रतिबंधित क्षेत्र में लोगों के आवागमन, प्रदर्शन, बैठक, सभा या धरना-प्रदर्शन की अनुमति नहीं होगी।
स्थानीय प्रशासन ने बाद में ये प्रतिबंधात्मक आदेश राष्ट्रपति भवन, उपराष्ट्रपति आवास और प्रधानमंत्री कार्यालय के आसपास के विभिन्न क्षेत्रों में भी लागू कर दिए। नेपाल सरकार ने अनिवार्य पंजीकरण प्रक्रिया का पालन नहीं करने पर चार सितंबर को फेसबुक, व्हाट्सऐप और एक्स सहित 26 सोशल मीडिया मंचों पर प्रतिबंध लगा दिया था। सरकार ने अपना रुख स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया मंचों पर प्रतिबंध उन्हें विनियमित करने के लिए लगाया गया है लेकिन आम जनता में धारणा यह है कि इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला होगा और सेंसरशिप की नौबत आ सकती है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने देश में अपंजीकृत सोशल मीडिया मंचों पर प्रतिबंध लगाने के उत्पने सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए रविवार को कहा कि राष्ट्र को कमजोर किए जाने के प्रयास कभी बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
