प्रेम में सहमति से बना संबंध दुष्कर्म नहीं : कोर्ट
∎ वर्ष 2022 में विवाहिता ने युवक पर लगाया था दुष्कर्म का आरोप
ऋषिकेश: सत्र न्यायालय ऋषिकेश ने दुष्कर्म के आरोपी युवक को कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। साथ ही आदेश में स्पष्ट किया कि सहमति से बने संबंध दुष्कर्म नहीं माने जा सकते।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता शुभम राठी के मुताबिक चंद्रेश्वर नगर निवासी एक विवाहिता ने बीते 18 जुलाई 2022 को स्थानीय युवक सोनू के विरुद्ध कोतवाली में एक रिपोर्ट दर्ज करवाई। शिकायतकर्ता की ओर से बताया गया कि वह विवाहित है। उसका अपने पति से वाद विवाद चला रहा था। उसी दौरान उसकी मुलाकात सोनू से हुई। विवाहिता ने आरोप लगाया कि सोनू ने उसे विवाह का प्रस्ताव दिया। इसकी क्रम में उसने जल्द पति से तलाक लेने की बात भी कही। उसके पश्चात दोनों की आपस में बातचीत होने लगी और सोनू ने महिला के साथ अनेकों बार शारीरिक संबंध बनाए। जब महिला का पति से तलाक हो गया तो उसने सोनू से विवाह की बात की। इस बीच सोनू ने किसी अन्य महिला से विवाह कर लिया। महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपित सोनू को गिरफ्तार किया। उसके बाद मुकदमा न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम, ऋषिकेश के न्यायालय में विचाराधीन रहा।
मजबूत जिरह के आगे विरोधाभासी बयान देने लगे गवाह
अभियुक्त सोनू की ओर से अधिवक्ता शुभम राठी ने कोर्ट में मजबूत पैरवी की। इस मामले में अभियोजन की ओर से कुल पांच गवाह पेश किए गए। सभी गवाहों से अधिवक्ता शुभम राठी ने सिलसिलेवार तार्किक जिरह की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने पाया कि मामले में पेश किए गए गवाहों के बयान विरोधाभासी थे। पीड़िता समेत अन्य कोई भी गवाह बचाव पक्ष के अधिवक्ता के प्रश्नों का संतोषजनक उत्तर नहीं दे सका। न्यायालय ने पाया कि पीड़िता एक बालिग विवाहित महिला थी जो कि सोनू से प्रेम करती थी। वह अपना भला-बुरा अच्छे से जानती थी। ये भी साबित हुआ कि सोनू की ओर से पीड़िता को झूठा शादी का झांसा नहीं दिया गया। अपितु पीड़िता ने सोनू के साथ शारीरिक संबंध प्रेम में होने के कारण सहमति से बनाया। ऐसी अवस्था में बने संबंध को बलात्कार नहीं कहा जा सकता। इसके अलावा अभियोजन अपना मामला संदेह से परे साबित करने में भी असफल रहा। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम, ऋषिकेश ने आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
