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बिल्डर शाश्वत–साक्षी के पासपोर्ट निरस्त, करोड़ों की ठगी की जांच के लिए SIT गठित

आरोपी बिल्डर शाश्वत गर्ग पत्नी समेत बीते करीब डेढ़ महीने से भी ज्यादा समय से गायब है.

देहरादून: करोड़ों की हेराफेरी के आरोपों में घिरे नामी बिल्डर शाश्वत गर्ग और उनकी पत्नी साक्षी गर्ग के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई है। निवेशकों की शिकायतों के आधार पर क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय ने दोनों के पासपोर्ट निरस्त कर दिए हैं। वहीं, मामले की गहराई से जांच के लिए आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप ने सीओ मसूरी की अध्यक्षता में पाँच सदस्यीय SIT गठित की है।

दंपत्ति करीब डेढ़ महीने से लापता है और पुलिस को संदेह है कि दोनों विदेश भागने की फिराक में थे। इंपीरियल वैली के निवेशक रितेश धीमान ने दावा किया है कि दंपत्ति नेपाल भाग गए थे, हालांकि बाद में वे वहाँ से भी फरार हो गए। इससे पहले शाश्वत गर्ग की कार हरिद्वार की एक पार्किंग में मिली थी, जिसके बाद मामला और संदिग्ध हो गया।

थाना राजपुर में दर्ज मुकदमे में शाश्वत गर्ग, उनकी पत्नी, माता-पिता और दो साले समेत कुल छह लोगों को आरोपित बनाया गया है। शिकायत अंतरिम सोसायटी प्रबंधन समिति आर्केडिया हिलाक्स के अध्यक्ष विवेक राज ने दर्ज कराई थी।

पासपोर्ट अधिकारी विजय शंकर पांडे के अनुसार पीड़ितों की ओर से कई शिकायतें मिली थीं, जिसके बाद दंपत्ति को नोटिस जारी किया गया, लेकिन उनके द्वारा कोई जवाब न मिलने पर पासपोर्ट निरस्त किए गए। SIT को मामले की जांच जल्द से जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

जानिए पूरा मामला: उन्होंने अपनी शिकायत में बताया कि मसूरी रोड पर एक अपार्टमेंट का निर्माण अतुल गर्ग निवासी राजनगर गाजियाबाद की जमीन पर किया जा रहा है. प्रोजेक्ट का निर्माण प्रवीण गर्ग और उनके बेटे शाश्वत गर्ग निवासी ऊषा कॉलोनी देहरादून की ओर से किया जा रहा है. इसमें शाश्वत गर्ग की पत्नी साक्षी गर्ग भी शामिल है. प्रोजेक्ट में शाश्वत के साले उत्तर प्रदेश के हापुड़ निवासी कुशल गोयल और सुलभ गोयल भी साझेदार हैं.

पीड़ित ने बताया गोल्डन एरा इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड के डेवलपर्स व डायरेक्टर ने मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) को प्रोजेक्ट संबंधी दस्तावेज नहीं दिए. जिस कारण एमडीडीए ने रेरा को पत्र लिखकर प्रोजेक्ट में फ्लैट की रजिस्ट्री करने से रोक लगा दी.

पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि गोल्डन एरा इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर अतुल गर्ग ने और अन्य बिल्डर ने यह इसलिए किया, क्योंकि उनके दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा कर जाली हस्ताक्षर के साथ फर्जी एग्रीमेंट, अलाटमेंट, सेल एग्रीमेंट आदि लगाए थे. फ्लैट के नाम पर बिल्डरों ने एक संगठित गिरोह बनाकर सेना के अधिकारियों को धोखा देकर अनुचित लाभ कमाया.

जिस गोल्डन एरा इंफ्राटेक के नाम का उपयोग कर यह पूरा घोटाला किया गया, उसके असली मालिक और डायरेक्टर भी अतुल गर्ग ही हैं. पावर ऑफ अर्टानी में अतुल ने ऐसा कोई जिक्र नहीं किया. उसके बाद जब उन्होंने भाई प्रवीण और भतीजे शाश्वत को अधिकृत किया तो आर्केडिया हिलाक्स में निवेशकों के करोड़ों रुपये निवेश कराए गए. फ्लैट बुक किए गए, लेकिन रजिस्ट्री नहीं कराई.

इसके अलावा पहले में जिन फ्लैट की रजिस्ट्री कराई जा चुकी थी, उनके भी फर्जी दस्तावेज तैयार कराकर बैंक और निजी हाउसिंग फाइनेंस कंपनी से करोड़ों रुपये का लोन लिया गया. जिस जमीन पर आर्केडिया हिलाक्स का निर्माण हुआ था. उस पर गोल्डन एरा इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड के डेवलपर्स व डायरेक्टर ने विभिन्न सरकारी और गैर सरकारी बैंकों व वित्तीय संस्थाओं से ऋण लिया हुआ है. यह ऋण निवेशकों के नाम से फर्जी दस्तावेज बनाकर लिया गया है. आरोप है कि इस प्रोजेक्ट में लोगों के फ्लैट के नाम पर फर्जी तरीके से लोन लिया गया था.

बिल्डर शाश्वत गर्ग, पत्नी साक्षी, पिता, मां और बेटे के साथ 17 अक्टूबर से लापता हैं. वह परिवार के साथ 16 अक्टूबर को अपने ससुराल हापुड़ थे. 17 अक्टूबर की दोपहर वहां से देहरादून के लिए निकले थे. वह दो कारों सवार में थे. उनके साले सुलभ गोयल ने हापुड़ कोतवाली में जीजा व उनके परिवार के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी, तभी पुलिस ने उनकी तलाश कर रही है. दोनों के नेपाल भागने की खबर है.

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