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देहरादून यूनिवर्सिटी वर्चस्व विवाद में फायरिंग, 7 उपद्रवी छात्र गिरफ्तार, अब तक 85 निष्कासित

देहरादून:  प्रेमनगर थाना क्षेत्र स्थित गंगोत्री बॉयज हॉस्टल के पास हुई फायरिंग के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दोनों गुटों से जुड़े सात उपद्रवी छात्रों को गिरफ्तार किया है। यह घटना 24 अगस्त की है, जिसने शैक्षणिक माहौल को हिला कर रख दिया था। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यह फायरिंग यूनिवर्सिटी में वर्चस्व को लेकर चले आ रहे विवाद का नतीजा थी।

फायरिंग कर दबदबा दिखाना चाहते थे छात्र

पुलिस सूत्रों के अनुसार, घटना के बाद फन एंड फूड मार्ग से एक छात्र को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने अपने साथी के साथ मिलकर विरोधी गुट को डराने और अपनी ताकत दिखाने के लिए फायरिंग की थी। इसके आधार पर पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया और दोनों गुटों से जुड़े सात छात्रों को चिन्हित कर गिरफ्तार किया।

कानूनी कार्रवाई और जमानत पर रिहाई

देहरादून एसएसपी अजय सिंह के निर्देश पर प्रेमनगर पुलिस ने इन सभी छात्रों को धारा 170 बीएनएसएस के तहत मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया। मजिस्ट्रेट ने सभी आरोपियों को भारी जमानत पर रिहा कर दिया। पुलिस ने संबंधित यूनिवर्सिटी को इन छात्रों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए रिपोर्ट भेजी है। एसएसपी अजय सिंह ने साफ चेतावनी दी कि “पढ़ाई की आड़ में अराजकता कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर कोई छात्र आपराधिक गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो उसे न केवल कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा बल्कि संस्थान से भी बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।

इस साल अब तक 85 छात्र निष्कासित

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2025 में अब तक प्रदेश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से करीब 85 उपद्रवी छात्रों को निष्कासित किया जा चुका है। यह कार्रवाई पुलिस द्वारा भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर यूनिवर्सिटियों और कॉलेजों ने की है। इससे पहले भी प्रेमनगर और आसपास के इलाकों में छात्र गुटबाजी को लेकर कई बार झड़पें और घटनाएं हो चुकी हैं।

उपद्रवी छात्रों पर निगरानी के लिए विशेष टीम

प्रेमनगर पुलिस ने उपद्रवी छात्रों पर अंकुश लगाने के लिए एक विशेष टीम का गठन किया है। यह टीम नियमित रूप से यूनिवर्सिटी और कॉलेज परिसरों की निगरानी कर रही है। पुराने विवादों की भी समीक्षा की जा रही है ताकि संभावित उपद्रवियों को चिन्हित कर समय रहते रोका जा सके। पुलिस का कहना है कि “शिक्षा के पवित्र माहौल को बिगाड़ने वाले किसी भी तत्व को बख्शा नहीं जाएगा।

देहरादून का यह ताजा मामला बताता है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में वर्चस्व की लड़ाई किस तरह अपराध का रूप ले रही है। पुलिस और प्रशासन के कड़े रुख के बावजूद छात्र राजनीति के नाम पर उपद्रव जारी है। अब देखने वाली बात होगी कि गिरफ्तार छात्रों पर यूनिवर्सिटी प्रशासन कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है और क्या इससे आने वाले समय में छात्रों में भय पैदा होगा या नहीं।

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