देहरादून: उत्तराखंड की सियासत में श्रीनगर से जुड़ा बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। श्रीनगर की निर्दलीय मेयर आरती भंडारी के साथ 10 पार्षद भाजपा में शामिल हो गए हैं। इस घटनाक्रम को कांग्रेस के लिए झटके के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मेयर के भाजपा में जाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
गणेश गोदियाल ने कहा कि आरती भंडारी पहले भी भाजपा से जुड़ी रही हैं और अब पार्टी में उनकी वापसी हुई है। उन्होंने दावा किया कि मेयर के भाजपा में शामिल होने से कांग्रेस पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।
हालांकि, भाजपा में शामिल हुए 10 पार्षदों को लेकर गोदियाल ने सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि इनमें अनुसूचित जाति वर्ग से जुड़े पार्षद भी हैं और उन्हें भाजपा में शामिल होने से पहले मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर विचार करना चाहिए था।
गोदियाल ने हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कथित मंच शुद्धीकरण के विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस घटना को लेकर दलित समाज में नाराजगी है और ऐसे समय में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतने वाले पार्षदों का भाजपा में जाना गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पार्षदों ने सामाजिक मुद्दों से ज्यादा अपने राजनीतिक हित को प्राथमिकता दी है। उनके मुताबिक, इस घटनाक्रम से श्रीनगर की स्थानीय राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना है और आगामी चुनावों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
हल्द्वानी रैली के नारे विवाद पर भी साधा निशाना
गणेश गोदियाल ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के दौरान कथित आपत्तिजनक नारे लगाए जाने के आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने मुख्यमंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि इस तरह के नारे लगाए गए थे तो सरकार को इसका प्रमाण सामने रखना चाहिए।
गोदियाल ने कहा कि बिना प्रमाण के इस तरह के आरोप लगाना उचित नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री पर राजनीतिक बयानबाजी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जनता के सामने पूरे मामले की सच्चाई स्पष्ट होनी चाहिए।
श्रीनगर मेयर और पार्षदों के भाजपा में शामिल होने तथा हल्द्वानी रैली को लेकर कांग्रेस-भाजपा के बीच बढ़ी बयानबाजी से उत्तराखंड की सियासत में आने वाले दिनों में राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
