उत्तरकाशी: सीमांत जिला उत्तरकाशी के मोरी विकासखंड में आवागमन के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। यहां पवाणी, ओसला और गंगाड़ जैसे दूरस्थ गांवों को जोड़ने वाला एकमात्र लकड़ी का पुल अब इस कदर जर्जर हो चुका है कि लोगों की जान पर बन आई है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग इस गंभीर स्थिति को लगातार नजरअंदाज कर रहा है।
चिलूड़ गदेरे पर पवाणी घराट के पास बना यह पुल तीन गांवों के लोगों और हर की दून ट्रेक पर जाने वाले पर्यटकों के लिए मुख्य मार्ग है। स्थानीय निवासी नौनियाल सिंह के अनुसार, यह पुल गोविंद वन्य जीव विहार परियोजना के तहत तैयार किया गया था, लेकिन लंबे समय से इसकी कोई मरम्मत नहीं की गई है।
अब स्थिति यह है कि पुल के लकड़ी के तख्ते सड़ चुके हैं और एबेंडमेंट (सहारा देने वाली संरचना) में लगे पत्थर भी उखड़ चुके हैं। बरसात के चलते गदेरे का जलस्तर भी बढ़ गया है, जिससे पुल बहने का खतरा मंडरा रहा है। नौनियाल सिंह ने यह भी बताया कि इस पुल पर पहले भी कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार पुल की मरम्मत की मांग की, लेकिन विभाग की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। अब उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
