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उत्तराखंड: गांव में जर्जर भवन में चल रहे तीन स्कूल, जान जोखिम में डाल कर पढ़ रहे तीन स्कूलों के बच्चे

चमोली: उत्तराखंड के चमोली जिले के देवाल ब्लॉक के सुदूरवर्ती गांव बमोटिया के छात्र-छात्राएं आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। गांव के एकमात्र भवन में तीन शिक्षण संस्थान – प्राथमिक विद्यालय, जूनियर हाईस्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। लेकिन दुखद बात यह है कि ये भवन पूरी तरह से जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है। इसकी छत तक दो लकड़ियों के सहारे खड़ी है, जो किसी भी वक्त गिरकर बड़ा हादसा कर सकती है।

इस विद्यालय में कुल 52 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं – जिनमें प्राथमिक के 19, जूनियर हाईस्कूल के 13, और आंगनबाड़ी केंद्र के 20 बच्चे शामिल हैं। भवन की खराब हालत के चलते गर्मियों और साफ मौसम में बच्चों को खुले आसमान के नीचे पढ़ाया जाता है, लेकिन बरसात के दौरान बच्चों को उसी खतरनाक भवन में पढ़ने को मजबूर किया जाता है, जिससे उनकी जान हर पल खतरे में बनी रहती है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि विद्यालय भवन की मरम्मत की मांग कई वर्षों से की जा रही है, लेकिन न तो प्रशासन और न ही नेताओं ने इस ओर कोई गंभीरता दिखाई। विद्यालय प्रबंधन समिति ने शिक्षा विभाग को कई बार प्रस्ताव भेजे, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

चौंकाने वाली बात यह है कि साल 2015-16 में गांव में जूनियर हाईस्कूल के भवन निर्माण के लिए 18 लाख रुपये स्वीकृत भी हुए थे, लेकिन भूमि चयन को लेकर कोई समाधान न निकल पाने के चलते निर्माण कार्य आज तक शुरू नहीं हो पाया।

स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि एक ओर सरकार शिक्षा के अधिकार की बात करती है, डिजिटल इंडिया की बात करती है, और दूसरी ओर हकीकत यह है कि पहाड़ी गांवों में आज भी बच्चे अपने जीवन को जोखिम में डालकर शिक्षा पाने के लिए स्कूल आते हैं।

इस पूरे मामले को लेकर जब मीडिया द्वारा सवाल उठाए गए, तब जाकर देवाल ब्लॉक के उप शिक्षा अधिकारी योगेन्द्र प्रसाद सेमवाल ने बयान दिया कि “इस मामले की जानकारी अब तक नहीं थी। अब जब संज्ञान में आया है तो जल्द आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।” इस तरह की घटनाएं पहाड़ी क्षेत्रों में शिक्षा की जमीनी हकीकत को उजागर करती हैं, जहां छात्र आज भी सुरक्षित भवन, बुनियादी सुविधाएं और सरकारी ध्यान से कोसों दूर हैं।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तत्परता दिखाता है, या फिर यह मुद्दा भी सिर्फ एक बयान बनकर रह जाएगा।

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