देहरादून/हल्द्वानी: 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के अवसर पर पूरे उत्तराखंड में शौर्य, वीरता और बलिदान की अमर गाथा को याद किया गया। देहरादून से लेकर हल्द्वानी तक, हर कोने में देशभक्ति की भावना साफ़ झलकती रही। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में आयोजित मुख्य समारोह में शिरकत कर कारगिल के वीरों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए और उनके बलिदान को याद किया।
मुख्य कार्यक्रम देहरादून में आयोजित हुआ, जहां सीएम धामी ने कहा कि कारगिल की घाटियों में आज भी हमारे वीरों का शौर्य गूंजता है। उन्होंने कहा कि जब-जब भारत मां पर संकट आया है, तब-तब हमारे रणबांकुरों ने जान की परवाह किए बिना तिरंगा लहराया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि कारगिल युद्ध में 537 सैनिकों ने वीरगति प्राप्त की, जिनमें उत्तराखंड के 75 वीर सपूत भी शामिल थे।
सीएम धामी ने कहा, “कारगिल की विजयगाथा उत्तराखंड के जांबाजों के बिना अधूरी है। ये भूमि बलिदान की भूमि है।” उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इन वीरों से प्रेरणा लें और राष्ट्र सेवा के लिए सदैव तत्पर रहें।
इस मौके पर उन्होंने उरी हमले, पुलवामा अटैक और सर्जिकल स्ट्राइक का भी उल्लेख किया और कहा कि अब भारत आतंक का जवाब ‘शब्दों’ से नहीं, ‘सर्जिकल एक्शन’ से देता है। उन्होंने कहा कि भारत अब आत्मनिर्भर हो रहा है, और हमारे हथियार विदेशी सेना से कहीं बेहतर हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के भारत की सेना पहले से कहीं अधिक सशक्त और आत्मनिर्भर हो चुकी है।
हल्द्वानी समेत अन्य जनपदों में भी कारगिल विजय दिवस को पूरे सम्मान के साथ मनाया गया। हल्द्वानी के शहीद पार्क में वीर शहीदों की स्मृति दीवार पर पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर कारगिल युद्ध में शहीद हुए जिले के पांच वीर सपूतों को याद किया गया। पूर्व केंद्रीय मंत्री और नैनीताल सांसद अजय भट्ट ने भी कार्यक्रम में भाग लेकर वीरों को नमन किया।
सैनिक कल्याण विभाग, पूर्व सैनिक संगठन और स्थानीय प्रशासन द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में वीरांगनाओं को सम्मानित किया गया, और देश के लिए दिए गए उनके योगदान को भी पूरे सम्मान के साथ याद किया गया।
जनता से लेकर जनप्रतिनिधियों तक, हर किसी ने कारगिल के वीरों को याद किया और इस दिन को ‘शौर्य दिवस’ के रूप में मनाया।
कारगिल विजय दिवस न केवल एक सैन्य जीत की याद है, बल्कि यह प्रेरणा है हर उस युवा के लिए जो भारत मां की सेवा का सपना देखता है। उत्तराखंड जैसे वीरों की भूमि पर, ये दिन खास भावनात्मक जुड़ाव रखता है।
