देहरादून: उत्तराखंड में स्वतंत्रता सेनानियों को मिलने वाले आरक्षण का दुरुपयोग किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। राज्य में कुछ लोगों पर आरोप है कि उन्होंने स्वयं को स्वतंत्रता सेनानियों का उत्तराधिकारी साबित करने के लिए फर्जी प्रमाण पत्र बनवाए और इसके आधार पर सरकारी नौकरियों तथा अन्य लाभों में आरक्षण का फायदा उठाया। यह खुलासा होते ही राज्य की राजनीति और प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है।
इस गंभीर मामले पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल संज्ञान लेते हुए विशेष जांच दल (SIT) के गठन के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री धामी ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और गहन जांच की जाए और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा न जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह शिकायत ‘स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति’ द्वारा की गई थी। समिति ने आरोप लगाया है कि राज्य में कई ऐसे लोग हैं, जिन्होंने झूठे दस्तावेजों के आधार पर स्वयं को स्वतंत्रता सेनानी परिवार का सदस्य घोषित कर दिया है। इन फर्जी दस्तावेजों के बल पर उन्होंने सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ उठाया है, जिससे वास्तविक पात्र लोगों को उनका हक नहीं मिल पाया।
मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि SIT जांच में पारदर्शिता रखी जाए और जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस मामले की जड़ तक जाकर सच्चाई सामने लाना आवश्यक है, ताकि भविष्य में कोई इस तरह से राष्ट्रीय गौरव से जुड़ी योजनाओं का दुरुपयोग न कर सके।
मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी बयान में कहा गया कि स्वतंत्रता सेनानियों और उनके परिवारों के सम्मान की रक्षा करना सरकार की प्राथमिकता है। फर्जी तरीके से आरक्षण प्राप्त करना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि उन महान सेनानियों के बलिदान का अपमान भी है, जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि SIT की जांच में कितने लोगों की संलिप्तता सामने आती है और क्या सरकार इस मामले में दोषियों को सजा दिला पाती है। साथ ही यह भी ज़रूरी होगा कि भविष्य में ऐसे फर्जीवाड़े को रोकने के लिए राज्य सरकार क्या ठोस कदम उठाती है।
इस पूरे प्रकरण ने राज्य में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है, और जनता अब सरकार की अगली कार्रवाई पर नजर गड़ाए हुए है।
