टॉस बना लोकतंत्र का निर्णायक, छात्र नेता नितिन बने ग्राम प्रधान.
चमोली: उत्तराखंड के त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में जहां एक ओर पूरे राज्य में लोकतंत्र का उत्सव देखने को मिला, वहीं चमोली जिले की एक ग्राम पंचायत में चुनावी नतीजों ने सबको चौंका दिया। ग्राम पंचायत बणद्वारा में प्रधान पद के लिए हुआ मुकाबला इतना करीबी रहा कि आखिरकार विजेता का फैसला टॉस के जरिए करना पड़ा।
यह रोचक स्थिति तब सामने आई जब दो प्रमुख प्रत्याशी — नितिन और रविन्द्र — दोनों को बराबर 138-138 वोट प्राप्त हुए। कुल 383 वोट डाले गए, जिसमें चार प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। जब मतगणना पूरी हुई तो सुबह 9 बजे ही साफ हो गया कि नतीजा टाई है। इसके बाद चुनाव अधिकारियों ने नियमानुसार टॉस का सहारा लिया, जो कि ऐसी स्थितियों में एक वैध प्रक्रिया मानी जाती है।
साढ़े 10 बजे टॉस की प्रक्रिया पूरी की गई और किस्मत ने नितिन का साथ दिया। टॉस में जीतकर नितिन को ग्राम प्रधान घोषित किया गया। नितिन की यह जीत न सिर्फ उनके लिए बल्कि उनके गांव बणद्वारा के लिए भी ऐतिहासिक बन गई।
कौन हैं नितिन?
नितिन वर्तमान में गोपेश्वर पीजी कॉलेज से एमए (अर्थशास्त्र) की पढ़ाई कर रहे हैं। छात्र राजनीति में भी नितिन का सक्रिय योगदान रहा है। वर्ष 2022-23 में वे एनएसयूआई से जुड़कर गोपेश्वर पीजी कॉलेज छात्रसंघ में महासचिव पद पर निर्वाचित हुए थे। उनकी सामाजिक सक्रियता और युवा वर्ग में पकड़ ने उन्हें ग्राम पंचायत चुनाव में मजबूती दी।
नितिन की जीत की खबर जैसे ही गांव में फैली, वहां जश्न का माहौल बन गया। उनके समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत किया। गांव के बुजुर्गों और युवाओं ने इस परिणाम को “किस्मत और मेहनत का अनोखा संगम” बताया।
राजनीति में युवाओं की भूमिका बढ़ी
इस चुनावी नतीजे ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि ग्रामीण राजनीति में अब युवाओं की भागीदारी बढ़ रही है। नितिन जैसे पढ़े-लिखे युवाओं का पंचायतों में आना विकास की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता
चुनाव अधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से अंजाम दिया। टाई जैसी स्थिति में टॉस का सहारा लेना राज्य निर्वाचन आयोग की गाइडलाइंस के अनुसार पूरी तरह वैध है।
चमोली के बणद्वारा पंचायत में हुए इस टॉस-निर्धारित चुनाव ने यह संदेश दिया कि लोकतंत्र न केवल संख्या का खेल है, बल्कि किस्मत भी कभी-कभी निर्णायक बन जाती है। नितिन की यह जीत युवा नेतृत्व को नई ऊर्जा दे रही है और ग्रामीण राजनीति में एक नई लहर पैदा कर रही है।
