Udayprabhat
uttrakhand

उत्तराखंड में पहली बार दो नदियों को जोड़ने की तैयारी, पिंडर से कोसी में पानी लाकर जल संकट से मिलेगा राहत

कोसी नदी का घटता जलस्तर बना चिंता का कारण, राष्ट्रीय जल विकास प्राधिकरण करेगा प्री-फिजिबिलिटी स्टडी
बागेश्वर से निकलने वाली पिंडर नदी को टनल के जरिए जोड़ा जाएगा कोसी से
परियोजना का उद्देश्य – कुमाऊं के लाखों लोगों को पेयजल और सिंचाई के लिए राहत
विशेषज्ञों ने जताई भूगर्भीय संवेदनशीलता पर चिंता, बोले: पहले कैचमेंट जोन का पुनर्जीवन जरूरी.

देहरादून: उत्तराखंड के लिए ऐतिहासिक कदम की ओर बढ़ते हुए सरकार ने राज्य की दो नदियों – पिंडर और कोसी – को जोड़ने की दिशा में बड़ा प्रस्ताव तैयार किया है। राष्ट्रीय जल विकास प्राधिकरण (NWDA) इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की प्री-फिजिबिलिटी स्टडी कर रहा है। अगर यह सफल हुआ, तो यह राज्य ही नहीं, पूरे देश में अपनी तरह का पहला नदी जोड़ प्रोजेक्ट होगा।

कोसी नदी, जो कुमाऊं क्षेत्र के अल्मोड़ा, नैनीताल और उत्तर प्रदेश के कई जिलों के लिए पेयजल और सिंचाई की जीवनरेखा मानी जाती है, साल दर साल जल संकट की ओर बढ़ रही है। बारिश आधारित इस नदी का जल स्तर तेजी से घटा है – 2023 में 75 क्यूसेक से घटकर 2024 में 70 क्यूसेक प्रति सेकंड रह गया है।

इसे देखते हुए सिंचाई विभाग ने पिंडारी ग्लेशियर से निकलने वाली पिंडर नदी का जल कोसी में डाइवर्ट करने का प्रस्ताव दिया है। योजना के तहत, पिंडर से एक टनल के माध्यम से सीमित जल को कोसी में स्थानांतरित किया जाएगा, ताकि सूखती कोसी में फिर से बहाव सुनिश्चित किया जा सके।

सिंचाई सचिव युगल किशोर पंत के अनुसार, “यह प्रोजेक्ट कोसी नदी के अस्तित्व को बचाने और कुमाऊं के शहरों की जल आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।”

हालांकि, भूगर्भ वैज्ञानिक प्रोफेसर एसपी सती और अन्य विशेषज्ञों ने इस पर चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि पहाड़ों में सुरंग बनाना भूगर्भीय और पारिस्थितिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील कार्य है। साथ ही, उन्होंने सुझाव दिया कि पहले कोसी के कैचमेंट एरिया और रिचार्ज जोन को पुनर्जीवित करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

पर्यावरणविद् गणेश रावत ने कहा, “कोसी में समाहित होने वाले 1500 से अधिक बरसाती नाले और 14 रिचार्ज जोन विलुप्ति के कगार पर हैं। यही कोसी के संकट की असली जड़ है, जिस पर पहले ध्यान देना चाहिए।”

प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए केंद्रीय स्तर पर मंजूरी की प्रतीक्षा है, जो प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट के आधार पर दी जाएगी। यदि यह सफल रहा, तो कोसी में जल संकट से राहत मिलने के साथ ही उत्तराखंड में जल प्रबंधन का नया अध्याय शुरू होगा।

Leave a Comment