बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के बाद उत्तराखंड बनेगा भारतीय दर्शन का प्रमुख शैक्षणिक केंद्र
वेद, पुराण, रामायण, महाभारत और वैदिक परंपराओं का होगा विधिवत शिक्षण
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत होगा चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम.
देहरादून: भारतीय ज्ञान परंपरा, दर्शन और सनातन संस्कृति को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने की दिशा में उत्तराखंड ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य के दून विश्वविद्यालय में जल्द ही हिंदू अध्ययन केंद्र की स्थापना की जाएगी। यह केंद्र बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा शिक्षण स्थल होगा, जहां भारतीय दर्शन, वेद, पुराण, रामायण, महाभारत और पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों का विधिवत अध्ययन कराया जाएगा।
भारतीय दर्शन और संस्कृति को मिलेगा संस्थागत मंच:
यह पहल उत्तराखंड सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप की जा रही है। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने सचिवालय में बैठक करते हुए इस केंद्र की स्थापना के लिए जरूरी दिशा-निर्देश अधिकारियों को जारी कर दिए हैं। उनका कहना है कि भारतीय आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और दार्शनिक परंपराओं के संरक्षण, विश्लेषण और प्रचार के लिए यह केंद्र एक मजबूत शैक्षणिक मंच बनेगा।
शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान नहीं, संस्कृति भी:
इस हिंदू अध्ययन केंद्र के माध्यम से छात्रों को भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित बहु-विषयक शिक्षा प्रदान की जाएगी। इससे न केवल नैतिकता और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा, बल्कि छात्रों में भारतीय सांस्कृतिक समाजबोध भी उत्पन्न होगा। विश्वविद्यालय में शुरू होने वाला चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम छात्रों को तत्व विमर्श, धर्म और कर्म विमर्श, वाद परंपरा, रामायण, महाभारत और अन्य ग्रंथों की गहन जानकारी देगा।
पाठ्यक्रम होंगे समृद्ध और जीवन उपयोगी:
पाठ्यक्रम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि छात्र केवल शास्त्रीय ज्ञान में नहीं, बल्कि व्यावहारिक जीवन मूल्यों और सांस्कृतिक व्यवहार में भी दक्ष हो सकें। सरल भाषा में पढ़ाए जाने वाले विषयों में छात्रों को वैदिक रीति-रिवाज, पूजा पद्धतियां, सांस्कृतिक परंपराएं और हिंदू जीवनदर्शन के मूल तत्व सिखाए जाएंगे।
सनातन संस्कृति से जुड़ेगा युवा वर्ग:
उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. रावत ने यह भी बताया कि यह केंद्र केवल शैक्षणिक अध्ययन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह छात्रों को सनातन वैदिक संस्कृति से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगा। छात्र-छात्राएं यहां हिंदू परंपराओं का वैज्ञानिक और सांस्कृतिक आधार भी समझ सकेंगे। यह केंद्र युवाओं में स्वाभिमान, भारतीयता और सांस्कृतिक चेतना को पुनः जागृत करेगा।
अन्य परियोजनाओं की भी समीक्षा:
इस दौरान मंत्री ने नित्यानंद हिमालय शोध एवं अध्ययन केंद्र और एमएससी अर्बन डेवलपमेंट मैनेजमेंट जैसे अन्य चल रहे शैक्षणिक प्रयासों की समीक्षा भी की। उन्होंने विश्वविद्यालय को सेंटर फॉर एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने और अधिक छात्रों को शोध के लिए आकर्षित करने के निर्देश दिए।
दून विश्वविद्यालय में स्थापित होने वाला यह हिंदू अध्ययन केंद्र उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देगा। यह पहल न केवल सांस्कृतिक पुनर्जागरण का माध्यम बनेगी, बल्कि भारतीय परंपराओं को वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिक एवं अकादमिक स्वीकृति दिलाने की दिशा में भी अहम भूमिका निभाएगी।
