देहरादून: उत्तरकाशी में हाल ही में आई आपदा को लेकर कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार के होने के बावजूद पर्वतीय क्षेत्रों के लोग हर समय भय और असुरक्षा की स्थिति में जी रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उत्तरकाशी की आपदा ने सरकार के आपदा प्रबंधन तंत्र की वास्तविकता को उजागर कर दिया है।
दसौनी ने कहा कि सरकार की तथाकथित ‘अत्याधुनिक’ आपदा प्रबंधन व्यवस्था इस आपदा के दौरान पूरी तरह से असफल रही। उन्होंने उत्तराखंड सरकार की वेबसाइट पर सूचीबद्ध ‘नेशनल लैंडस्लाइड रिस्क मिटिगेशन सिस्टम’ और ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’ जैसे सिस्टमों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब ये व्यवस्थाएं हैं, तो फिर समय रहते कोई चेतावनी क्यों नहीं दी गई?
उन्होंने आरोप लगाया कि मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने में देरी हुई, राहत शिविरों की व्यवस्था नाकाफी रही, और मौके पर जिम्मेदार अधिकारी भी मौजूद नहीं थे। यह सब सरकार की लापरवाही और संवेदनहीनता को दर्शाता है।
गरिमा दसौनी ने सत्तारूढ़ बीजेपी नेताओं के व्यवहार पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब उत्तरकाशी के लोग जीवन और मृत्यु के बीच जूझ रहे थे, उस वक्त कृषि मंत्री गणेश जोशी, विधायक सविता कपूर और उमेश शर्मा काऊ देहरादून में राखी बंधवाने और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने में व्यस्त थे।
उन्होंने इसे भाजपा की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा बताते हुए कहा कि ऐसे कठिन समय में भी ये नेता राज्यवासियों की पीड़ा को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं, जो अत्यंत निंदनीय है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने सरकार से मांग की कि वह केवल कागज़ी दावों तक सीमित न रहकर, ज़मीनी स्तर पर मजबूत आपदा प्रबंधन तंत्र विकसित करे ताकि भविष्य में इस प्रकार की त्रासदियों से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।
