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सूचना का अधिकार अधिनियम, पारदर्शिता और विश्वास की आधारशिला, आयोग ने पूरे किए 20 वर्ष

राज्यपाल ने कहा—जागरूकता ही सशक्तिकरण, आयोग ने अब तक 13.46 लाख से अधिक आवेदन निस्तारित किए.

देहरादून: राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) जनता और प्रशासन के बीच विश्वास, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने बुधवार को राजभवन में मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी से शिष्टाचार भेंट के दौरान यह विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर सूचना आयुक्त योगेश भट्ट, दलीप सिंह कुंवर, देवेंद्र कुमार और कुशला नंद भी उपस्थित रहे।

मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी ने राज्यपाल को आयोग की गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आयोग की स्थापना को 20 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। इस अवधि में प्रदेशभर में लोक सूचना अधिकारियों को कुल 13,46,817 आवेदन प्राप्त हुए। प्रथम अपीलीय अधिकारियों के पास 1,35,430 प्रकरण पहुंचे, जबकि आयोग स्तर पर 59,750 आवेदन दर्ज हुए। इनमें से 58,719 का निस्तारण किया जा चुका है और केवल 1,031 प्रकरण वर्तमान में लंबित हैं।

रातूड़ी ने बताया कि आयोग ने द्वितीय अपील और शिकायतों के लिए ऑनलाइन सुविधा शुरू की है। आवेदक अब लिखित बयान, अनुपालन रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज भी ऑनलाइन अपलोड कर सकते हैं। साथ ही, अपील और शिकायतों की ट्रैकिंग की सुविधा भी दी गई है। द्वितीय अपील में सर्वाधिक 32 प्रतिशत आवेदन देहरादून से और 25 प्रतिशत हरिद्वार से प्राप्त हुए, जबकि चम्पावत, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और बागेश्वर से 1 प्रतिशत से भी कम आवेदन दर्ज हुए।

राज्यपाल ने निर्देश दिए कि सूचना का अधिकार अधिनियम का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, विशेषकर उन जिलों में जहां अपीलें और शिकायतें बेहद कम दर्ज हो रही हैं। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में जागरूकता का स्तर कम है, वहां विशेष अभियान चलाकर अधिक से अधिक लोगों को सूचना प्राप्ति के अधिकार से जोड़ा जाए।

 

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