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Uttarakhand: हल्द्वानी में प्रस्तावित स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी को झटका, केंद्र ने जमीन देने से किया इंकार – UTTARAKHAND FIRST SPORTS UNIVERSITY

हल्द्वानी: उत्तराखंड की पहली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के निर्माण की राह में बड़ा रोड़ा आ गया है। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय खेल स्टेडियम, हल्द्वानी के पास बनने वाली इस यूनिवर्सिटी को लेकर राज्य सरकार ने लंबे समय से तैयारियां कर रखी थीं, लेकिन अब केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से भूमि हस्तांतरण की मंजूरी न मिलने के कारण परियोजना पर फिलहाल रोक लग गई है।

राष्ट्रीय खेल दिवस पर होना था शिलान्यास

उत्तराखंड सरकार और खेल विभाग ने योजना बनाई थी कि 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर इस यूनिवर्सिटी का शिलान्यास किया जाएगा। इसके लिए हल्द्वानी के गौलापार क्षेत्र में जमीन भी चिह्नित कर ली गई थी। हालांकि, मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यूनिवर्सिटी की श्रेणी ‘नॉन साइट स्पेसिफिक’ परियोजनाओं में आती है, इसलिए पहले राजस्व विभाग की भूमि तलाशी जानी चाहिए। इसी कारण फिलहाल यूनिवर्सिटी के शिलान्यास पर ब्रेक लग गया है।

गौलापार में चुनी गई थी जमीन

राज्य सरकार ने खेल यूनिवर्सिटी के लिए गौलापार में स्टेडियम के पास जमीन देखी थी। करीब 13 हेक्टेयर क्षेत्रफल की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए प्रस्ताव तैयार किया गया था। लेकिन केंद्रीय मंत्रालय ने वन भूमि देने से इनकार कर दिया। बताया जा रहा है कि इस यूनिवर्सिटी के लिए यूजीसी (यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन) से मान्यता पहले ही मिल चुकी है, लेकिन भूमि हस्तांतरण में पेंच फंसने से पूरी योजना अटक गई है।

पहले ही हो चुकी हैं नियुक्तियाँ

खेल विभाग ने यूनिवर्सिटी की स्थापना को लेकर कई कदम पहले ही उठा लिए थे। यहां तक कि कुल सचिव और वित्त नियंत्रक की नियुक्ति भी की जा चुकी है। सरकार ने बड़े स्तर पर तैयारियाँ की थीं ताकि राष्ट्रीय खेल दिवस पर इस महत्वाकांक्षी परियोजना को राज्य को समर्पित किया जा सके।

खेल विभाग की उम्मीदें

राज्य सरकार का मानना है कि यूनिवर्सिटी बनने से प्रदेश के खिलाड़ियों को न केवल बेहतर प्रशिक्षण मिलेगा बल्कि उच्च शिक्षा और खेल सुविधाओं के नए अवसर भी खुलेंगे। सरकार का उद्देश्य था कि इस यूनिवर्सिटी के माध्यम से उत्तराखंड के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य का नाम रोशन कर सकें।

फिलहाल टला शिलान्यास

29 अगस्त को निर्धारित शिलान्यास कार्यक्रम अब टल गया है। खेल विभाग और राज्य सरकार अब वैकल्पिक भूमि तलाशने की दिशा में काम कर रहे हैं। यदि राजस्व भूमि उपलब्ध होती है, तो परियोजना पर जल्द आगे बढ़ा जा सकता है।

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