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सीएम धामी ने श्रमिकों के लिए शुरू किया “श्रमिक सेवा ऐप”, मजदूरों के खातों में ट्रांसफर हुए ₹17 करोड़

  • मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्रमिकों के लिए विकसित श्रमिक सेवा मोबाइल ऐप का लोकार्पण किया।
  • 8005 श्रमिकों के खातों में डीबीटी के माध्यम से 17 करोड़ रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर की गई।
  • पिछले 6 महीनों में 19,833 लाभार्थियों को कुल 47.14 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं।

देहरादून: पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को श्रमिकों के कल्याण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए “श्रमिक सेवा मोबाइल ऐप” का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने 8005 श्रमिकों के खातों में डीबीटी के माध्यम से 17 करोड़ रुपये से अधिक की राशि हस्तांतरित की।

पारदर्शिता के लिए पूरी तरह ऑनलाइन व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिकों को मिलने वाली सहायता में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ऑफलाइन अनुदान वितरण को समाप्त कर दिया गया है। अब सभी प्रक्रियाएं ऑनलाइन और डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के खातों में की जा रही हैं।

उन्होंने बताया कि अब तक 11,828 लाभार्थियों को 29.89 करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है, जबकि पिछले छह महीनों में कुल 19,833 श्रमिकों को 47.14 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं।

स्थानीय कौशल प्रशिक्षण पर विशेष फोकस

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पलायन रोकने के लिए श्रमिकों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार कौशल प्रशिक्षण दिया जाए। इसमें प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन, मिस्त्री और कारपेंटर जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही, योग और वेलनेस क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए श्रमिकों के बच्चों को निःशुल्क प्रशिक्षण देने की भी योजना है।

विदेशों में रोजगार के अवसर बढ़ाने की योजना

पुष्कर सिंह धामी ने यह भी कहा कि कौशल प्रशिक्षण प्राप्त श्रमिकों को विदेशों में रोजगार दिलाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए विदेश मंत्रालय में पंजीकृत एजेंसियों के माध्यम से प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

स्वास्थ्य और रोजगार सुरक्षा पर जोर

सरकार ने श्रमिकों को प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना से जोड़ने और उनके नियमित स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था कार्यस्थल पर ही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि उनके रोजगार में किसी प्रकार का व्यवधान न आए।

बोर्ड की प्रगति रिपोर्ट

कार्यक्रम में श्रमायुक्त पी.सी. दुम्का ने जानकारी दी कि UKLCCMS पोर्टल के माध्यम से अब तक 16,000 से अधिक संस्थानों का पंजीकरण हो चुका है। इसके तहत 80 लाख रुपये का शुल्क और 324 करोड़ रुपये सेस के रूप में एकत्र किया गया है, जिसका उपयोग श्रमिकों के कल्याण में किया जा रहा है।

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