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शेयर बाजार में मुनाफे का लालच देकर साइबर ठगों ने रिटायर्ड कर्नल पे लगाई 11 लाख की चपत

देहरादून: देश की सीमाओं पर वर्षों तक डटे रहे एक रिटायर्ड कर्नल साइबर ठगों के सुनियोजित जाल का शिकार हो गए। शेयर बाजार में निवेश पर ऊंचा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर ठगों ने उनसे 11 लाख 20 हजार रुपये ठग लिए। मामले में साइबर क्राइम थाना देहरादून में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और जांच तेज कर दी गई है।

पुलिस को दी गई तहरीर में पंकज विहार, शिमला बाईपास रोड निवासी रिटायर्ड कर्नल सुरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि कुछ समय पूर्व उनके पास वर्तिका आनंद नाम की महिला का फोन आया। महिला ने स्वयं को वेंचुरा सिक्योरिटीज लिमिटेड के सीईओ हेमंत की सहायक बताया और शेयर बाजार में सुरक्षित व लाभकारी निवेश का प्रस्ताव रखा। शुरुआती बातचीत में पेशेवर अंदाज और कंपनी का नाम सुनकर उन्हें भरोसा हो गया।

4 नवंबर 2025 को कर्नल को व्हाट्सएप पर एक लिंक भेजा गया, जिसके माध्यम से वे ‘नेक्स्टजैन कैपिटल नेटवर्क’ नामक ग्रुप से जुड़ गए। इस ग्रुप में 148 सदस्य और आठ एडमिन बताए गए। प्रतिदिन रात करीब 8 बजे शेयर बाजार से जुड़ी सलाह और संभावित मुनाफे के स्क्रीनशॉट साझा किए जाते थे। ग्रुप में सक्रिय मोबाइल नंबर और प्रोफाइल खुद को प्रतिष्ठित कंपनी से जुड़ा दिखाते थे, जिससे सदस्यों का विश्वास और मजबूत होता गया।

अगले ही दिन, 5 नवंबर को उन्हें एक कथित वीआईपी ग्रुप में जोड़ दिया गया, जहां वन-टू-वन निवेश मार्गदर्शन दिया जाता था। इसके बाद ‘वेंटसेक प्रो’ नाम का एक मोबाइल एप डाउनलोड कराया गया। एप पर उन्हें लॉगइन आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराया गया, जहां निवेश की गई राशि और कथित लाभ दर्शाया जाता था। शुरुआत में एप पर मुनाफा बढ़ता हुआ दिखाया गया, जिससे कर्नल का विश्वास और पक्का हो गया।

अन्य सदस्यों को भारी लाभ मिलता देख कर्नल ने भी अलग-अलग किस्तों में कुल 11 लाख 20 हजार रुपये निवेश कर दिए। लेकिन जब उन्होंने अपनी जमा धनराशि निकालने का प्रयास किया तो न तो रकम ट्रांसफर हुई और न ही किसी ने संपर्क किया। कुछ ही समय बाद उन्हें सभी व्हाट्सएप ग्रुप से हटा दिया गया और मोबाइल नंबर भी बंद हो गए। तब जाकर उन्हें साइबर ठगी का अहसास हुआ।

पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट और संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस मोबाइल नंबरों, बैंक खातों, एप सर्वर और डिजिटल ट्रांजैक्शन की तकनीकी जांच कर रही है। साथ ही संदिग्ध खातों को ट्रेस कर रकम की रिकवरी के प्रयास भी किए जा रहे हैं।

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