देहरादून: उत्तराखंड एसटीएफ और देहरादून पुलिस की संयुक्त टीम ने राजधानी में बड़ी आपराधिक साजिश को नाकाम करते हुए कुख्यात सुनील राठी गैंग के दो सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों को राजपुर थाना क्षेत्र से दबोचा गया। पुलिस ने उनके कब्जे से दो अवैध पिस्टल और सात जिंदा कारतूस बरामद किए हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि आरोपी किसी बड़ी वारदात की फिराक में थे। समय रहते कार्रवाई से संभावित घटना टाल दी गई।
एसटीएफ की टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि गैंग से जुड़े दो बदमाश देहरादून में सक्रिय हैं। सूचना के आधार पर 26 फरवरी की देर शाम संयुक्त टीम ने छापेमारी कर भानु और पारस नामक आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में से एक पहले पूर्वांचल के कुख्यात गिरोहों से भी जुड़ा रहा है। बताया जा रहा है कि वह पहले मुख्तार अंसारी और संजीव जीवा गैंग के लिए शूटर के तौर पर काम कर चुका है। फिलहाल पुलिस इन संबंधों की गहराई से जांच कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, आरोपी देहरादून और हरिद्वार की विवादित संपत्तियों में हस्तक्षेप कर गैंग के प्रभाव को बढ़ाने का प्रयास कर रहे थे। इस मामले में वित्तीय लेनदेन और आपराधिक साजिश के पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

कौन है सुनील राठी?
सुनील राठी पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड क्षेत्र का एक कुख्यात अंतरराज्यीय अपराधी है, जो वर्तमान में पौड़ी जेल में निरुद्ध है। मूल रूप से बागपत निवासी राठी पर हत्या, हत्या का प्रयास, रंगदारी, अवैध हथियार और गैंगवार जैसे कई गंभीर मामले दर्ज हैं।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, पिता की हत्या के बाद उसने आपराधिक दुनिया में कदम रखा और धीरे-धीरे पश्चिमी यूपी में अपना गिरोह खड़ा कर लिया। बाद में उसे अंतरराज्यीय माफिया घोषित किया गया।
एसटीएफ अधिकारियों ने बताया कि राज्य की जेलों में बंद कुख्यात अपराधियों और उनके सक्रिय नेटवर्क पर लगातार नजर रखी जा रही है। हालिया कार्रवाई इसी रणनीति का हिस्सा है। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और उनके अन्य साथियों की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए निगरानी और सख्त कर दी गई है।
