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अर्धकुंभ को “कुंभ” बताने का प्रयास, परंपराओं से खिलवाड़: मेहरा दसौनी गरिमा

देहरादून: उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने धामी सरकार पर हरिद्वार में होने वाले अर्धकुंभ को “कुंभ” बताने के प्रयास को गंभीर परंपरा–विरोधी कदम बताते हुए तीखा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा किया जा रहा यह प्रयास न केवल धार्मिक मान्यताओं से छेड़छाड़ है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खुला खिलवाड़ भी है।

गरिमा ने कहा कि वेद–पुराणों में अर्धकुंभ और कुंभ दोनों की स्पष्ट परिभाषा दर्ज है। कुंभ मेला 12 वर्षों में सूर्य, चंद्र और बृहस्पति के विशेष खगोलीय योग पर होता है, जबकि अर्धकुंभ छह वर्षों के अंतराल पर आयोजित होने वाला पर्व है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कहीं भी अर्धकुंभ को कुंभ घोषित करने का कोई शास्त्रीय आधार नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जल्दबाजी में परंपराओं को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत कर रही है। पहले ही भाजपा शासन में ‘कुंभ घोटाला’ उत्तराखंड की छवि को नुकसान पहुँचा चुका है, ऐसे में अर्धकुंभ को “कुंभ” बताना धार्मिक व्यवस्थाओं और संत समाज की अनदेखी है।
गरिमा ने कहा कि संत समाज भी इस निर्णय से नाखुश है और परंपरागत स्वरूप में परिवर्तन को अस्वीकार्य बता रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि धार्मिक आयोजनों को राजनीतिक चमक-दमक का साधन बनाना निंदनीय है। उन्होंने कहा “अर्धकुंभ को अर्धकुंभ ही कहा जाएगा। सत्य, शास्त्र और परंपरा के आधार पर ही निर्णय होने चाहिए, न कि प्रचार और राजनीतिक हितों के आधार पर।

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